तेलंगाना की राजनीति में सोमवार का दिन बेहद भावनात्मक और ऐतिहासिक रहा, जब भारत राष्ट्र समिति (BRS) की कल्वाकुंतला कविता का विधान परिषद (MLC) से दिया गया इस्तीफा औपचारिक रूप से मंजूर कर लिया गया। विधान परिषद के चेयरमैन गुत्ता सुखेंद्र रेड्डी ने सदन में कविता के संबोधन के बाद उनके इस्तीफे को स्वीकार करने की घोषणा की। इसके साथ ही एक ऐसे राजनीतिक अध्याय का अंत हो गया, जो वर्षों से राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभा रहा था। कविता वर्ष 2021 में निजामाबाद स्थानीय निकाय क्षेत्र से निर्विरोध MLC चुनी गई थीं और उन्हें पार्टी की मजबूत नेता माना जाता था। इस्तीफा स्वीकार होते ही इस सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया है, जिससे राज्य में संभावित उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। यह फैसला सिर्फ एक पद छोड़ने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे BRS के भीतर चल रही गहरी उथल-पुथल का संकेत भी माना जा रहा है।
सदन में छलके आंसू ही पा लगाए गंभीर आरोप
इस्तीफे से पहले सदन का माहौल उस वक्त बेहद भावुक हो गया, जब के. कविता अपनी बात रखते हुए खुद को संभाल नहीं पाईं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जिस पार्टी से उन्हें यह पद मिला था, उससे अब उनका कोई संबंध नहीं बचा है, ऐसे में पद पर बने रहना उनके लिए नैतिक रूप से गलत था। कविता ने आरोप लगाया कि दिल्ली आबकारी नीति मामले में जब केंद्रीय एजेंसियों ने उन्हें निशाना बनाया, तब पार्टी नेतृत्व ने उनका साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि संकट के समय उन्हें अकेला छोड़ दिया गया, जिससे उन्हें गहरा आघात पहुंचा। कविता ने BRS के आंतरिक ढांचे और फैसलों पर भी सवाल उठाए और पार्टी के संविधान को ‘कागजों तक सीमित’ बताया। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में BRS नेतृत्व पर सीधा हमला माना जा रहा है, जिसने पार्टी के भीतर असहजता और बढ़ा दी है।
सितंबर में दिया था इस्तीफा, अब जाकर मिली मंजूरी
के. कविता ने 3 सितंबर 2025 को ही BRS की प्राथमिक सदस्यता और MLC पद से इस्तीफा दे दिया था। यह फैसला उनके पार्टी से निलंबन के ठीक एक दिन बाद आया था। हालांकि उस समय विधान परिषद के चेयरमैन ने उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया था, जिससे मामला लंबित बना रहा। हाल ही में 2 जनवरी को कविता ने व्यक्तिगत रूप से चेयरमैन से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट की और इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध किया। इसके बाद सोमवार को इस पर अंतिम फैसला लिया गया। विधायी सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के साथ ही यह साफ हो गया कि कविता अब औपचारिक रूप से विधान परिषद का हिस्सा नहीं हैं। इस देरी ने भी कई राजनीतिक सवाल खड़े किए थे, लेकिन अब मंजूरी के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है और राजनीतिक चर्चाओं का रुख आगे की रणनीति पर आ गया है।
नई सियासी पारी की तैयारी
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि के. कविता अब पूरी तरह नए राजनीतिक रास्ते पर आगे बढ़ने की तैयारी में हैं। उनके संगठन ‘तेलंगाना जागृति’ को एक पूर्ण राजनीतिक दल में बदलने की अटकलें लंबे समय से लगाई जा रही थीं, जिन्हें उनके इस्तीफे ने और मजबूत कर दिया है। कविता पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि वह आगामी विधानसभा चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाएंगी और एक वैकल्पिक राजनीतिक ताकत के रूप में उभरना चाहती हैं। उनके इस कदम से न केवल BRS की अंदरूनी दरार खुलकर सामने आई है, बल्कि राज्य की राजनीति में एक नया त्रिकोणीय समीकरण बनने की संभावना भी बढ़ गई है। कांग्रेस और सत्तारूढ़ दल के बीच चल रही राजनीति में अब कविता की संभावित एंट्री नए सवाल और नई चुनौतियां खड़ी कर सकती है। साफ है कि के. कविता का यह इस्तीफा सिर्फ एक विदाई नहीं, बल्कि तेलंगाना की राजनीति में आने वाले बड़े बदलावों की भूमिका भी हो सकता है।
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