Jamia News: दीवारों पर नारों से लेकर इमरान मसूद की हिरासत तक, जामिया में क्यों बढ़ा विवाद?

Jamia News: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। इसी बीच यूनिवर्सिटी की दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे जाने का मामला सामने आया। इसके बाद विवाद बढ़ गया और राजनीतिक दलों के नेता भी इस मामले पर बयान देने लगे। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने घटना को गंभीर बताते हुए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने की बात कही है। खबरों के मुताबिक, दीवारों से नारों को हटा दिया गया है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हुआ है कि नारे किसने लिखे थे। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि इस विवाद के जरिए छात्र संघ चुनाव की मांग से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।

 छात्र संघ चुनाव को लेकर क्या चाहते हैं छात्र?

जामिया के छात्र चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी में जल्द से जल्द छात्र संघ चुनाव कराए जाएं। छात्रों की मांग है कि चुनाव की तारीख घोषित की जाए, प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई वापस ली जाए और सिक्योरिटी एडवाइजर व चीफ प्रॉक्टर को उनके पदों से हटाया जाए। वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए एक कमेटी बनाई गई है। प्रशासन के मुताबिक, संविधान और नियम तैयार होने के बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। लेकिन छात्र इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को चुनाव की तारीख भी बतानी चाहिए। कुछ छात्र अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रह सकता है।

 इमरान मसूद को पुलिस ने हिरासत में क्यों लिया?

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिलने जामिया पहुंचे थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। मसूद ने कथित विवादित नारों के मामले पर सफाई देते हुए कहा कि वह कश्मीर को भारत से अलग करने वाले किसी भी नारे का समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और ऐसे नारों की निंदा की जानी चाहिए। दूसरी तरफ, बीजेपी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने भी इस मामले में जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह समेत कई नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। वहीं, कुछ नेताओं का आरोप है कि छात्र संघ चुनाव की मांग को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। इस तरह जामिया का मामला अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।

 जामिया में 2005 के बाद क्यों नहीं हुए छात्र संघ चुनाव?

जामिया में छात्र संघ चुनाव का मुद्दा कई साल पुराना है। जानकारी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी में आखिरी बार 2005 में छात्र संघ चुनाव हुए थे। इसके बाद 31 मार्च 2006 को प्रशासन ने हिंसा और पढ़ाई में रुकावट का हवाला देते हुए छात्र संघ को भंग कर दिया था। वर्ष 2012 में चुनाव कराने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई थी, लेकिन चुनाव दोबारा शुरू नहीं हो सके। अब छात्र चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी प्रशासन चुनाव की तारीख जल्द घोषित करे। दूसरी ओर, कथित विवादित नारों के मामले ने इस आंदोलन को और चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन चुनाव को लेकर क्या फैसला लेता है और नारों के मामले की जांच में क्या सामने आता है।

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