Thursday, January 22, 2026

दोस्ती की तारीफ, टैरिफ की मार! दावोस में ट्रंप ने मोदी को बताया शानदार इंसान, फिर क्यों अटकी है भारत-अमेरिका ट्रेड डील?

स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के सालाना सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की है। एक भारतीय पत्रकार के सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि वह पीएम मोदी का बहुत सम्मान करते हैं और उन्हें एक शानदार इंसान के साथ-साथ अपना बेहतरीन दोस्त मानते हैं। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि भारत और अमेरिका के बीच एक “बहुत अच्छी ट्रेड डील” होने वाली है। उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दुनिया की नजरें वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापारिक साझेदारियों और भू-राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई हैं। दावोस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच से आई यह टिप्पणी कूटनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि अमेरिका भारत को रणनीतिक और आर्थिक दोनों ही स्तरों पर एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है।

50 फीसदी टैक्स ने बढ़ाई व्यापारिक दूरी

हालांकि ट्रंप की यह तारीफ जितनी मधुर सुनाई देती है, उतना ही कड़वा सच इसके पीछे छिपा है। पिछले पांच महीनों से अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं के आयात पर कुल 50 प्रतिशत तक का भारी भरकम टैरिफ लगा रखा है, जो मौजूदा वैश्विक व्यापार व्यवस्था में सबसे ज्यादा माना जा रहा है। इस टैरिफ का 25 फीसदी हिस्सा तो खासतौर पर भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने के चलते “जुर्माने” के तौर पर लगाया गया है। इस फैसले का सीधा असर भारत के निर्यातकों, खासकर स्टील, टेक्सटाइल और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ा है। जानकारों का मानना है कि एक तरफ ट्रंप दोस्ती और सम्मान की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इतने ऊंचे टैरिफ ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है। यही वजह है कि जिस ट्रेड डील को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है, वह अब तक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या ट्रंप की तारीफ सिर्फ कूटनीतिक बयान है या इसके पीछे वाकई किसी बड़े समझौते की तैयारी है।

कॉल विवाद और 500% टैरिफ की धमकी

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर पिछले कई महीनों से बातचीत चल रही है, लेकिन यह अब भी अधर में लटकी हुई है। हाल ही में अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को फोन नहीं किया, जिसकी वजह से यह डील आगे नहीं बढ़ सकी। इस बयान ने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, हालांकि भारत सरकार ने इस दावे को तुरंत और सख्ती से खारिज कर दिया। इसके बाद ट्रंप प्रशासन से जुड़े एक वरिष्ठ सहयोगी ने यहां तक कह दिया कि अमेरिका भारत पर टैरिफ को 500 प्रतिशत तक बढ़ाने वाले विधेयक को भी मंजूरी दे सकता है। इस तरह के बयानों ने दोनों देशों के रिश्तों में अनिश्चितता और बढ़ा दी। विशेषज्ञों का कहना है कि ये बयान दबाव की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं, ताकि भारत को कुछ अहम व्यापारिक शर्तों पर सहमत कराया जा सके। वहीं, भारत लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि व्यापारिक समझौते आपसी सम्मान और संतुलन के आधार पर होने चाहिए, न कि धमकियों के जरिए।

नए अमेरिकी राजदूत के बयान से बढ़ी उम्मीद

इन तमाम आरोप-प्रत्यारोप और टैरिफ की धमकियों के बीच भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर का हालिया बयान उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक भागीदार मानता है और दोनों देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत अब भी जारी है। उनके मुताबिक, मतभेदों के बावजूद दोनों देश आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का दावोस में दिया गया बयान और राजदूत गोर की टिप्पणी इस बात का संकेत हो सकती है कि आने वाले समय में व्यापारिक रिश्तों में कुछ नरमी देखने को मिले। हालांकि, यह भी साफ है कि जब तक ऊंचे टैरिफ का मुद्दा सुलझता नहीं, तब तक किसी बड़ी डील पर मुहर लगना आसान नहीं होगा। ऐसे में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप की दोस्ती और तारीफ सिर्फ शब्दों तक सीमित रहेगी या वाकई भारत-अमेरिका संबंधों में एक नए आर्थिक अध्याय की शुरुआत होगी।

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