Telangana Rape Case: तेलंगाना के वारंगल जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सभ्य समाज के माथे पर कलंक लगा दिया है। रायपर्ती मंडल के एके तांडा गांव की रहने वाली एक 21 साल की आदिवासी युवती के साथ हुई हैवानियत ने पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि बुधवार की काली रात को रावूरु तांडा के चार युवकों ने युवती को अपनी हवस का शिकार बनाया। दरिंदगी की इंतहा यहीं खत्म नहीं हुई; आरोपियों ने युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसे फांसी के फंदे पर लटका दिया ताकि इस जघन्य हत्याकांड को आत्महत्या का रूप दिया जा सके। लेकिन युवती के शरीर पर मौजूद संघर्ष के निशान और भारी रक्तस्राव ने दरिंदों की इस साजिश की पोल खोल दी है। इस घटना ने एक बार फिर निर्भया और हाथरस जैसी त्रासदियों की यादें ताजा कर दी हैं।
पीड़ित परिवार ने बयां किया दर्द
पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस वारदात को अंजाम देने वाले चारों युवक इलाके के कुख्यात अपराधी हैं, जो अक्सर गांजे के नशे में धुत रहते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, नशे की लत ने इन युवकों को इतना अंधा कर दिया था कि वे आए दिन गांव की महिलाओं और लड़कियों के साथ छेड़खानी और अभद्रता करते थे। बुधवार रात जब युवती अकेली थी, तब इन दरिंदों ने उसे अपना निशाना बनाया। परिवार का कहना है कि उनकी बेटी को पहले बेरहमी से प्रताड़ित किया गया और फिर सबूत मिटाने के इरादे से उसे मौत के घाट उतार दिया गया। वर्धन्नपेट मॉर्चरी में रखे युवती के शव को देखकर परिजनों का कलेजा फट रहा है। उनकी मांग है कि इन वहशियों को समाज के बीच लाकर वही सजा दी जाए जो उन्होंने उस निर्दोष बेटी को दी है।
न्याय के लिए सड़क पर उतरा परिवार
इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित परिवार का सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि घटना के तुरंत बाद जब वे न्याय की गुहार लेकर थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। बार-बार विनती करने के बावजूद कार्रवाई में देरी की गई, जिससे आक्रोशित होकर परिजनों और रिश्तेदारों ने वर्धन्नपेट मॉर्चरी के सामने जातीय राजमार्ग (National Highway) को पूरी तरह जाम कर दिया है। हाईवे पर बैठे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक चारों आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और उन्हें फांसी की सजा का भरोसा नहीं मिलता, तब तक वे शव का पोस्टमॉर्टम नहीं होने देंगे। हाईवे जाम होने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया है और प्रशासन के हाथ-पांव फूल रहे हैं।
आदिवासी बस्तियों में असुरक्षा
यह घटना तेलंगाना के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की बदतर होती स्थिति का कच्चा चिट्ठा खोलती है। आदिवासी तांडा बस्तियों में रहने वाले लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है और सवाल पूछा है कि आखिर आदिवासी बेटी की सुरक्षा करने में प्रशासन क्यों विफल रहा? क्या पुलिस केवल रसूखदारों की सुनती है? नशे के बढ़ते कारोबार और उस पर लगाम न लग पाने के कारण आज एक और मासूम जिंदगी बलि चढ़ गई। सोशल मीडिया पर #JusticeForWarangalDaughter ट्रेंड कर रहा है और लोग जल्द से जल्द फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इन आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजकर इस बेबस परिवार को इंसाफ दिला पाएगा।
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