देश की सबसे बड़ी अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट में अमूमन बेहद शांत और गंभीर माहौल रहता है। लेकिन हाल ही में यहाँ एक ऐसी अप्रत्याशित घटना घटी, जिसने न्याय के मंदिर को झकझोर कर रख दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई चल रही थी, तभी याचिकाकर्ता वकील प्रबल प्रताप ने कानून और मर्यादा की सारी धज्जियां उड़ा दीं। देखते ही देखते कोर्ट रूम एक हाई-वोल्टेज ड्रामे के मंच में बदल गया। वकील ने न सिर्फ जजों के सामने अभद्रता की, बल्कि खुद को ‘संप्रभु’ (Sovereign) बताते हुए जजों को ही हुक्म सुनाना शुरू कर दिया। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है।
‘मैं संप्रभु हूँ, तुम्हें आदेश देता हूँ’— जजों से बदसलूकी की पार की हदें
यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस केवी विश्वनाथ और जस्टिस आलोक अराधे की दो सदस्यीय बेंच के सामने आया। पैरवी कर रहे वकील प्रबल प्रताप का गुस्सा इस कदर भड़का कि उन्होंने दोनों जजों को सरेआम ‘न्यायिक सेवक’ (Judicial Servant) कह डाला। जब जस्टिस विश्वनाथ ने इस पर आपत्ति जताते हुए पूछा कि क्या आप हमें आदेश दे रहे हैं? तो वकील ने अहंकार में चूर होकर जवाब दिया, “हाँ, मैं संप्रभु हूँ और मैं आपको आदेश देता हूँ कि लखनऊ के विकास नगर के एसीपी के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने का हुक्म जारी करें।” कोर्ट रूम में मौजूद अन्य लोग वकील की इस ढिठाई को देखकर स्तब्ध रह गए।
कागज हवा में उछाले, बाहर जाते-जाते बोले— ‘ये दे देना CJI को’
माहौल तब और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया जब वकील ने कोर्ट रूम के भीतर ही केस से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण कागजात हवा में उछाल दिए। मर्यादा की सीमाएं तब पूरी तरह टूट गईं जब सुरक्षाकर्मी और कोर्ट अधिकारी इस उपद्रवी वकील को शांत कराने और बाहर ले जाने की कोशिश करने लगे। बाहर निकलते वक्त वकील ने देश के चीफ जस्टिस (CJI) के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अपशब्दों का इस्तेमाल किया। उसने कोर्ट रूम से बाहर धकेले जाते समय चिल्लाकर कहा, “ये ले जाकर सीजेआई को दे देना।” इस पूरी घटना ने सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा और वकीलों के आचरण पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि कुछ समय पहले भी एक वकील द्वारा सीजेआई पर जूता फेंकने की कोशिश का मामला सामने आ चुका है।
इतने बड़े अपमान के बाद भी जजों ने दिखाया बड़प्पन, सुनाया यह बड़ा फैसला
आमतौर पर अदालत की अवमानना या जजों से ऐसी बदसलूकी करने पर तुरंत जेल या भारी जुर्माने की कार्रवाई होती है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच ने जो किया, उसने सबको हैरान कर दिया। जजों ने बेहद ठंडे दिमाग से काम लिया और याचिकाकर्ता की मानसिक या परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बड़प्पन दिखाया। कोर्ट ने अपने लिखित आदेश में साफ कहा कि वे याचिकाकर्ता के इस अपमानजनक व्यवहार पर उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेंगे। हालांकि, अदालत ने उसके अनुचित व्यवहार को देखते हुए उसकी स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) और खुद बहस करने की अनुमति मांगने वाली सभी अर्जियों को पूरी तरह खारिज कर दिया।








