जिंदगी से लंबी हो गई पीड़ा… हरीश राणा केस में फैसला सुनाते वक्त भावुक हो गए सुप्रीम कोर्ट के जज

भारत में इच्छामृत्यु को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी है। बताया जा रहा है कि राणा पिछले कई वर्षों से गंभीर बीमारी के कारण परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में थे और जीवन पूरी तरह मेडिकल सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर था। कोर्ट ने इस मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखना जरूरी है। फैसला सुनाते समय बेंच के जज पारदीवाला भावुक भी हो गए।

परिवार की देखभाल की सुप्रीम कोर्ट ने की सराहना

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में हरीश राणा के परिवार की प्रतिबद्धता और त्याग का विशेष रूप से जिक्र किया। अदालत ने कहा कि राणा के परिवार ने लंबे समय तक उनका साथ नहीं छोड़ा और लगातार उनकी देखभाल करते रहे। कई सालों तक मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद परिवार का यह समर्पण प्रशंसनीय है। कोर्ट ने माना कि इस तरह की स्थिति में परिवार पर मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक दबाव भी काफी बढ़ जाता है, इसलिए न्यायिक प्रक्रिया में इन पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

एक्टिव और पैसिव यूथेनेशिया का अंतर किया साफ

फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने एक्टिव और पैसिव यूथेनेशिया के बीच का फर्क भी स्पष्ट किया। कोर्ट ने बताया कि भारत में एक्टिव यूथेनेशिया यानी किसी मरीज को दवा देकर जान लेना कानूनन अपराध है और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। वहीं पैसिव यूथेनेशिया में मरीज को दी जा रही लाइफ सपोर्ट प्रणाली को हटाया जाता है, जो कुछ शर्तों के साथ कानूनी रूप से संभव है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में डॉक्टरों और मेडिकल बोर्ड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

किन परिस्थितियों में मिल सकती है अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में रहने वाले मरीजों के मामलों में पैसिव यूथेनेशिया पर विचार किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए सख्त प्रक्रिया तय की गई है। अदालत के अनुसार पहले प्राइमरी मेडिकल बोर्ड मरीज की स्थिति की जांच करेगा और फिर सेकेंडरी बोर्ड उसकी पुष्टि करेगा। दोनों बोर्ड की सहमति के बाद ही लाइफ सपोर्ट हटाने का फैसला लिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मरीज की गरिमा और मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखना है।

Read more-वर्ल्ड चैंपियन टीम इंडिया को BCCI देगा 131 करोड़, जानें खिलाड़ियों में कैसे बंटेगी इनाम की राशि

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img