कर्नाटक के बेलगावी जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। रायबाग तालुक के खंडल गांव स्थित हुलिकंटेश्वर मंदिर में हाल ही में वार्षिक जत्रा का आयोजन हुआ था। जत्रा समाप्त होने के बाद मंदिर प्रशासन ने परंपरा के अनुसार दानपेटी (हुण्डी) खोली और चढ़ावे की गिनती शुरू की। इसी दौरान 100 रुपये का एक नोट अलग नजर आया। जब कर्मचारियों ने उसे ध्यान से देखा तो पाया कि उस पर किसी ने पेन से एक निजी प्रार्थना लिखी हुई थी।
नोट पर लिखा था— “भगवान, मेरी तकलीफ दूर करो… मेरी सास अगले साल की जत्रा से पहले मर जाए।” यह वाक्य पढ़ते ही मंदिर प्रबंधन और वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। आमतौर पर दानपेटी में लोग अपनी खुशहाली, परिवार की तरक्की, नौकरी, संतान, सेहत या आर्थिक उन्नति जैसी सकारात्मक मनोकामनाएं लिखते हैं। लेकिन किसी के निधन की प्रार्थना इस तरह खुले तौर पर लिखकर दान में डालना बेहद दुर्लभ घटना मानी जा रही है।
मंदिर से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से वे दानपेटी खोलते आ रहे हैं, लेकिन इस तरह की मनौती पहली बार देखने को मिली है। घटना की खबर धीरे-धीरे पूरे गांव में फैल गई और देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गई।
मंदिर प्रशासन की प्रतिक्रिया
हुलिकंटेश्वर मंदिर के प्रबंधन ने इस पूरे मामले को गंभीर विवाद का रूप देने से बचने की कोशिश की है। उनका कहना है कि दानपेटी में आने वाली हर वस्तु या पर्ची भक्त की निजी भावना होती है। इस नोट पर न तो किसी का नाम लिखा था और न ही कोई पहचान का संकेत। इसलिए यह पता लगाना संभव नहीं है कि यह संदेश किसने लिखा— बहू ने, दामाद ने या किसी और परिवारजन ने।
मंदिर समिति के एक सदस्य ने बताया कि इतने वर्षों की सेवा में उन्होंने लोगों को तरह-तरह की मनोकामनाएं लिखते देखा है। कई बार लोग अपनी निजी परेशानियों को शब्दों में व्यक्त करते हैं, लेकिन किसी की मौत की कामना जैसी प्रार्थना असाधारण है। हालांकि प्रशासन का मानना है कि इसे कानूनी या जांच का मामला नहीं बनाया जाएगा, क्योंकि यह केवल एक भावनात्मक अभिव्यक्ति है।
मंदिर प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि दानपेटी में आए पैसे को सामान्य चढ़ावे की तरह ही गिना गया है। नोट को भी अन्य दान की तरह स्वीकार किया गया। उनके मुताबिक, यह घटना केवल “अनोखी प्रार्थना” के रूप में देखी जा रही है, न कि किसी अपराध या साजिश के रूप में।
गांव और सोशल मीडिया में तेज बहस
जैसे ही यह खबर गांव से बाहर निकली, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। लोगों ने इस घटना पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों का मानना है कि यह पारिवारिक तनाव का गंभीर संकेत हो सकता है। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति भगवान से इस तरह की प्रार्थना कर रहा है तो उसके पीछे गहरी मानसिक पीड़ा या घरेलू कलह हो सकती है।
वहीं कुछ लोग इसे गुस्से या मजाक में लिखा गया संदेश बता रहे हैं। उनका कहना है कि कभी-कभी लोग आवेश में आकर ऐसी बातें लिख देते हैं, जिनका मतलब यह नहीं होता कि वे सच में ऐसा चाहते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस घटना को लेकर मीम्स और बहस दोनों चल रहे हैं। कुछ यूजर्स इसे घरेलू रिश्तों की जटिलता का उदाहरण बता रहे हैं, तो कुछ इसे समाज में बढ़ते तनाव का संकेत मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक रिश्तों में संवाद की कमी कई बार छोटी बातों को बड़े तनाव में बदल देती है। यदि किसी व्यक्ति को अपने परिवार में परेशानी है, तो समाधान बातचीत और समझदारी से ही निकल सकता है, न कि नकारात्मक कामनाओं से।
रिश्तों की कड़वाहट या भावनाओं का विस्फोट?
यह घटना केवल एक नोट या एक प्रार्थना भर नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के पारिवारिक ढांचे पर भी सवाल खड़े करती है। भारतीय समाज में सास-बहू का रिश्ता अक्सर चर्चा और विवाद का विषय रहा है। टीवी धारावाहिकों से लेकर आम बातचीत तक, इस रिश्ते में खटास की कहानियां अक्सर सुनने को मिलती हैं।
हालांकि हर परिवार की स्थिति अलग होती है, लेकिन इस तरह की मनौती यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं भावनात्मक तनाव मौजूद है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि जब व्यक्ति अपनी बात खुलकर नहीं कह पाता, तो वह किसी न किसी रूप में अपनी पीड़ा व्यक्त करता है। यहां वह अभिव्यक्ति 100 रुपये के नोट पर लिखी एक पंक्ति के रूप में सामने आई।
मंदिर प्रशासन ने भले ही इसे एक साधारण भावनात्मक प्रतिक्रिया माना हो, लेकिन यह घटना समाज के लिए एक आईना बन गई है। यह याद दिलाती है कि रिश्तों में संवाद, सहनशीलता और समझदारी कितनी जरूरी है। भगवान से किसी के निधन की प्रार्थना करने के बजाय, रिश्तों को सुधारने की कोशिश करना ही बेहतर रास्ता हो सकता है।
फिलहाल, यह नोट मंदिर की दानपेटी से निकली एक ऐसी कहानी बन गया है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है और लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर उस व्यक्ति के मन में कितना दर्द या गुस्सा रहा होगा, जिसने ऐसी मनौती लिखी।







