सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में 92% अंक हासिल करने वाले श्रीयांश वत्स की कहानी आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। जब लोग उन्हें ‘बेचारा’ समझने लगे थे, उसी वक्त उन्होंने ठान लिया था कि वह अपनी पहचान बीमारी से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से बनाएंगे। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और शानदार प्रदर्शन कर सभी को चौंका दिया। यह सिर्फ एक रिजल्ट नहीं, बल्कि हिम्मत और जिद की जीत है।
कैंसर से जंग, फिर भी नहीं छोड़ी पढ़ाई
श्रीयांश को साल 2023 में लिंफोमा कैंसर का पता चला था। इलाज के बाद वह ठीक हुए, लेकिन 2025 में बीमारी फिर से लौट आई। इस बार इलाज और भी कठिन था, जिसमें बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी बड़ी प्रक्रिया शामिल थी। कई महीनों तक इलाज चलता रहा, शरीर कमजोर होता गया, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। जब दूसरे बच्चे स्कूल जा रहे थे, तब श्रीयांश दवाइयों और इलाज के बीच अपने सपनों को जिंदा रखे हुए थे। उन्होंने तय कर लिया था कि चाहे हालात जैसे भी हों, वह बोर्ड परीक्षा जरूर देंगे।
हर कदम पर मिला सपोर्ट, बनी जीत की राह
इस कठिन सफर में श्रीयांश के माता-पिता और शिक्षकों ने उनका पूरा साथ दिया। उनके पिता दिग्विजय सिंह ने बताया कि कई लोगों ने सलाह दी थी कि बेटे को पढ़ाई से दूर रखा जाए, लेकिन श्रीयांश खुद पढ़ाई करना चाहते थे। उन्होंने ऑनलाइन क्लासेस लीं और धीरे-धीरे अपनी तैयारी मजबूत की। शुरुआत में वह हाफ-ईयरली परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हर परीक्षा में अपने अंक बेहतर करते गए और आखिरकार बोर्ड में शानदार रिजल्ट हासिल किया।
‘सबको गलत साबित करना है’ बना लक्ष्य
श्रीयांश ने बताया कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका आत्मविश्वास था। वह रोज देर रात तक पढ़ाई करते और खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करते। उन्होंने तय किया था कि किसी भी हाल में हार नहीं माननी है। उनके मन में एक ही बात थी—सबको गलत साबित करना है। आज उनका सपना है कि वह आगे चलकर चार्टर्ड अकाउंटेंट बनें और इसी तरह मेहनत करते रहें। उनकी यह कहानी साबित करती है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी मुश्किल रास्ता रोक नहीं सकता।








