Sunday, March 1, 2026

खामेनेई की मौत से राजस्थान में शिया मुसलमान ने लिया बड़ा फैसला, नहीं मनाएंगे ईद और…

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर से राजस्थान का शिया समुदाय गहरे सदमे में है। इस घटना के बाद राज्य के कई शहरों में शोक का माहौल है। शिया संगठनों ने सामूहिक बैठक कर फैसला लिया है कि इस वर्ष ईद का त्योहार पारंपरिक तरीके से नहीं मनाया जाएगा। न नए कपड़े पहने जाएंगे, न घरों में सिवइयां बनेंगी और न ही किसी तरह की खुशियां मनाई जाएंगी। हालांकि, धार्मिक परंपरा निभाने के लिए ईद की नमाज अदा की जाएगी, लेकिन वह भी काली पट्टी बांधकर, जो शोक और संवेदना का प्रतीक होगी। अलविदा जुमे की नमाज भी इसी तरह सादगी और मातमी माहौल में पढ़ी जाएगी।

जयपुर से जोधपुर तक पसरा गम का माहौल

राजस्थान के कई शहरों—जयपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर, जोधपुर, झालावाड़ और बूंदी—में शिया समुदाय के घरों और इमामबाड़ों में सन्नाटा और शोक देखा जा रहा है। रमजान के पवित्र महीने में इस तरह की खबर आने से लोगों की भावनाएं और भी आहत हुई हैं। समुदाय के बुजुर्गों का कहना है कि ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा गया। कई जगहों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जा रही हैं, जहां लोग खामेनेई की आत्मा की शांति के लिए दुआ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग उनके विचारों और नेतृत्व को याद करते हुए भावनात्मक संदेश साझा कर रहे हैं। कई युवाओं ने प्रोफाइल तस्वीरों पर काली पट्टी लगाकर अपना शोक व्यक्त किया है।

धार्मिक आस्था से जुड़ा गहरा संबंध

शिया समुदाय के लिए खामेनेई सिर्फ एक राजनीतिक या धार्मिक नेता नहीं थे, बल्कि उन्हें 12वें इमाम के प्रतिनिधि यानी नायब इमाम के रूप में भी माना जाता था। शिया मान्यता के अनुसार 12वें इमाम की वापसी का विश्वास उनकी आस्था का अहम हिस्सा है। ऐसे में खामेनेई की भूमिका साधारण धार्मिक नेतृत्व से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती थी। उनके निधन को समुदाय अपनी आस्था पर गहरा आघात मान रहा है। कई लोगों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि एक युग का अंत है। धार्मिक विद्वानों ने भी कहा है कि यह समय धैर्य और एकजुटता बनाए रखने का है।

स्कूलों और सामाजिक संगठनों में शोक संदेश

राज्य के कई शिया बहुल इलाकों में स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं ने शोक संदेश जारी किए हैं। कुछ जगहों पर एक दिन का प्रतीकात्मक अवकाश भी घोषित किया गया है। युवाओं और छात्रों में भी इस खबर को लेकर गहरा असर देखा जा रहा है। राजधानी जयपुर में कुछ स्थानों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन भी हुए, जहां लोगों ने काली पट्टी बांधकर अपनी भावनाएं जाहिर कीं। समुदाय के नेताओं ने अपील की है कि शांति बनाए रखें और कानूनी दायरे में रहकर अपने दुख को व्यक्त करें। फिलहाल पूरे राज्य में शिया समाज एकजुट होकर अपने नेता को श्रद्धांजलि दे रहा है और उनकी शिक्षाओं को आगे बढ़ाने का संकल्प ले रहा है।

Read more-जंग का असर भारत तक: खाड़ी देशों की फ्लाइट्स अचानक रद्द, एयरपोर्ट पर हंगामा

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img