पॉक्सो एक्ट से जुड़े चर्चित मामले में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद को गिरफ्तारी से राहत दी गई थी। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में मांग की गई थी कि दोनों को दी गई अग्रिम जमानत रद्द की जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत के इस फैसले के बाद शंकराचार्य पक्ष ने राहत की सांस ली है। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष को बड़ा झटका लगा है। मामला सामने आने के बाद से धार्मिक और सामाजिक हलकों में लगातार चर्चा बनी हुई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है।
हाईकोर्ट ने मार्च में दी थी गिरफ्तारी से राहत
इस पूरे मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 मार्च 2026 को अहम फैसला सुनाया था। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली थी। कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ दोनों को गिरफ्तारी से राहत दी थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद शंकराचार्य समर्थकों ने इसे न्याय और सत्य की जीत बताया था। हालांकि शिकायतकर्ता पक्ष इस आदेश से संतुष्ट नहीं था और उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इससे साफ हो गया है कि फिलहाल दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी और जांच की प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
माघ मेला और महाकुंभ से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला प्रयागराज में आयोजित माघ मेला और महाकुंभ से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया था कि मठ में रहने वाले कुछ नाबालिग बटुकों के साथ कथित यौन शोषण किया गया। आरोपों के बाद प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। अदालत के निर्देश के बाद झूंसी थाना पुलिस ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने कुछ बच्चों के बयान भी दर्ज किए। पुलिस सूत्रों के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट में भी शोषण से जुड़े कुछ संकेत मिलने की बात कही गई थी। यही वजह रही कि मामला तेजी से चर्चा में आ गया। हालांकि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और पुलिस आगे भी मामले की जांच कर रही है।
शंकराचार्य पक्ष ने आरोपों को बताया साजिश
दूसरी तरफ शंकराचार्य पक्ष लगातार इन आरोपों को झूठा और साजिश करार देता रहा है। उनके वकील पीएन मिश्रा ने अदालत में दलील दी थी कि जिन बच्चों का नाम इस मामले में लिया जा रहा है, उनमें से एक बच्चा कभी मठ में रहा ही नहीं। उन्होंने कहा कि यह मामला धार्मिक और सामाजिक छवि खराब करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शंकराचार्य पक्ष का कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। अदालत में यह भी कहा गया कि आरोपों के पीछे प्रशासनिक और राजनीतिक साजिश हो सकती है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शंकराचार्य और उनके समर्थकों को बड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। आने वाले समय में पुलिस जांच और अदालत की अगली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।








