Gurmeet Ram Rahim Singh एक बार फिर 30 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आ गया है। रोहतक की सुनारिया जेल से निकलने के बाद वह सीधे सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ, जहां उसके समर्थकों ने स्वागत की तैयारियां शुरू कर दीं। साल 2017 में साध्वियों के यौन शोषण मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से यह उसकी 16वीं पैरोल या फरलो मानी जा रही है। इससे पहले जनवरी 2026 में भी उसे 40 दिनों की पैरोल मिली थी। लगातार मिल रही पैरोल को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि गंभीर अपराधों में सजा काट रहे दोषियों को इतनी बार राहत कैसे मिल रही है। वहीं डेरा समर्थकों का कहना है कि पैरोल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और राम रहीम को नियमों के तहत ही राहत दी जाती रही है।
रेप केस में हुई थी 20 साल की सजा
गुरमीत राम रहीम को अगस्त 2017 में सीबीआई की विशेष अदालत ने दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उसे 20 साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद हरियाणा और पंजाब के कई इलाकों में हिंसा भी भड़क गई थी। उस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था। दोषी ठहराए जाने के बाद से राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। हालांकि जेल में रहते हुए भी उसका प्रभाव उसके अनुयायियों के बीच लगातार बना हुआ है। हर बार पैरोल मिलने पर उसके समर्थक बड़ी संख्या में सक्रिय हो जाते हैं और सोशल मीडिया से लेकर डेरा परिसर तक माहौल अलग नजर आता है। यही वजह है कि उसकी पैरोल हर बार चर्चा का विषय बन जाती है। इस बार भी सिरसा आश्रम में विशेष तैयारियां देखने को मिलीं और डेरा प्रेमियों में उत्साह दिखाई दिया।
हत्या के मामलों ने भी बढ़ाई थीं मुश्किलें
सिर्फ रेप केस ही नहीं, बल्कि पत्रकार हत्या और डेरा से जुड़े अन्य मामलों में भी राम रहीम का नाम सामने आया था। जनवरी 2019 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में सीबीआई अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद अक्टूबर 2021 में डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह हत्या मामले में भी अदालत ने उसे और अन्य आरोपियों को दोषी माना था। हालांकि बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में राम रहीम को बरी कर दिया था। इन मामलों के चलते राम रहीम की छवि लगातार विवादों में बनी रही। बावजूद इसके, उसके समर्थकों की संख्या में खास कमी नहीं आई। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी आज भी उसे आध्यात्मिक गुरु मानते हैं और उसकी हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। यही कारण है कि जेल से बाहर आने की हर खबर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बन जाती है।
पैरोल पर फिर शुरू हुई बहस
राम रहीम को बार-बार मिल रही पैरोल को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने कई बार सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि एक गंभीर अपराध में सजा काट रहे व्यक्ति को इतनी बार राहत मिलना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। वहीं हरियाणा सरकार का कहना रहा है कि पैरोल का फैसला कानूनी नियमों और जेल मैनुअल के अनुसार लिया जाता है। दूसरी ओर, डेरा समर्थकों का दावा है कि राम रहीम समाज सेवा और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़े रहते हैं, इसलिए उन्हें कानून के दायरे में राहत मिलती है। इस बार भी उनकी पैरोल ऐसे समय में आई है जब कई राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं, इसलिए इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि 30 दिन की पैरोल के दौरान राम रहीम क्या गतिविधियां करता है और क्या इस बार भी उसके कार्यक्रमों को लेकर प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ेगी।







