Noida News: नोएडा में लापरवाही का एक और खौफनाक मामला सामने आया है, जहां पानी से भरे गहरे गड्ढे ने एक छात्र की जान ले ली। सेक्टर-150 में स्थित एक निर्माणाधीन प्लॉट में भरे पानी में गिरने से एमिटी यूनिवर्सिटी के एक छात्र की डूबकर मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि इससे पहले भी इसी तरह की घटना में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान जा चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक लापरवाही की कीमत लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी।
आदेश दिए गए, लेकिन फाइलों में ही दबकर रह गए
इस घटना से पहले नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने शहर में मौजूद सभी खतरनाक गड्ढों से पानी निकालने और उनकी बैरीकेडिंग करने के सख्त निर्देश दिए थे। सिविल विभाग को 15 दिन के भीतर यह काम पूरा करने के लिए कहा गया था। साथ ही बिल्डरों को भी नोटिस जारी कर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी यह आदेश जमीन पर नहीं उतर पाए। पूरा प्लान सिर्फ कागजों और फाइलों तक सीमित रह गया, जिसका नतीजा एक और दर्दनाक हादसे के रूप में सामने आया।
युवराज केस के बाद भी नहीं लिया सबक
युवराज मेहता की मौत के बाद प्रशासन ने कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई का दिखावा जरूर किया, लेकिन असल जिम्मेदारों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी को हटाने के बजाय एक जूनियर कर्मचारी को हटाकर मामले को ठंडा कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो जाता है कि सिस्टम के भीतर जवाबदेही की कमी है। सेक्टर-150 और सेक्टर-94 जैसे क्षेत्रों में कई गहरे गड्ढे अब भी खुले पड़े हैं, जो कभी भी किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकते हैं।
निर्माण स्थल बना खतरा, कोर्ट केस बना बहाना?
जिस प्लॉट में यह हादसा हुआ, वह एक बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जहां डबल बेसमेंट के लिए करीब 15 मीटर गहरा गड्ढा खोदा गया था। निर्माण कार्य रुकने के बाद इसमें पानी भर गया और यह जगह मौत का जाल बन गई। बताया जा रहा है कि इस परियोजना को लेकर मामला कोर्ट में लंबित है, जिसे प्रशासन अपनी कार्रवाई न करने का कारण बता रहा है। हालांकि सवाल यह है कि जब खतरा स्पष्ट था, तो सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए? अब एक और परिवार अपने बच्चे को खो चुका है, और शहर में डर और गुस्से का माहौल है।
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