तेलंगाना के नारायणपेट जिले में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने इंसानियत और सिस्टम दोनों पर सवाल खड़े कर दिए। कोसगी कस्बे के शिवाजी चौक पर एक टिपर लॉरी ने मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मारी, जिसमें 26 वर्षीय युवक मोगुलैया की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। परंतु जब शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल ले जाने की कोशिश हुई तो एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाई। इसी मजबूरी में एक पुलिसकर्मी ने ठेला मंगवाया और युवक के शव को उसमें रखकर करीब आधा किलोमीटर तक अस्पताल की ओर खींचा। यह दृश्य जिसने भी देखा उसकी आंखें भर आईं और प्रशासन पर सवाल उठने लगे।
एंबुलेंस सेवा की लापरवाही पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि एंबुलेंस सेवाएं कई बार देरी से पहुंचती हैं, जिससे हादसों के बाद पीड़ित और उनके परिजनों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। मोगुलैया के शव को ठेले पर ले जाते देख लोग आक्रोशित हो उठे और सवाल किया कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आती है कि एक पुलिसकर्मी को शव ढोना पड़ता है। यह घटना न केवल एंबुलेंस व्यवस्था की पोल खोलती है, बल्कि सरकार और प्रशासन की तत्परता पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। सोशल मीडिया पर भी घटना का वीडियो वायरल हो गया, जहां लोग पुलिसकर्मी की मजबूरी और संवेदनशीलता की तारीफ कर रहे हैं, वहीं सिस्टम की नाकामी पर नाराजगी जता रहे हैं।
इंसानियत का चेहरा बने पुलिसकर्मी
कठिन परिस्थितियों में भी पुलिसकर्मी का कदम इंसानियत की मिसाल बन गया। जहां एक ओर एंबुलेंस सेवा की लापरवाही से लोगों का गुस्सा भड़का, वहीं दूसरी ओर पुलिसकर्मी की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता ने दिल जीत लिया। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारी आपातकालीन सेवाएं सचमुच समय पर लोगों तक पहुंच पा रही हैं। हादसे के बाद पूरे इलाके में गम का माहौल है और लोग मोगुलैया के परिवार के साथ खड़े होने की बात कह रहे हैं। फिलहाल प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन यह घटना लंबे समय तक लोगों के दिलों में सवाल छोड़ जाएगी।
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