भारत ने कलपक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के जरिये एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। यह रिएक्टर क्रिटिकैलिटी के उस स्तर तक पहुंच गया है, जहां वह अपने आप न्यूट्रॉन उत्पन्न करता है और निरंतर परमाणु विखंडन से ऊर्जा उत्पादन शुरू करता है। इस सफलता का मतलब है कि भारत अब परमाणु ईंधन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहेगा और दुनिया की परमाणु महाशक्ति के रूप में उभरेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निर्णायक मोड़ बताया है।
PFBR की खासियत यह है कि यह केवल ऊर्जा ही नहीं पैदा करता, बल्कि नया परमाणु ईंधन भी उत्पन्न करता है। इससे भारत भविष्य में थोरियम और प्लूटोनियम का स्थायी भंडार तैयार कर सकेगा, जो ऊर्जा सुरक्षा को नई ऊँचाई पर ले जाएगा।
ईंधन की कमी अब नहीं, नया भंडार तैयार
PFBR की सबसे बड़ी खूबी इसकी ब्रीडर तकनीक में छिपी है। सामान्य रिएक्टर केवल ऊर्जा उत्पादन के लिए यूरेनियम का उपयोग करते हैं, जबकि PFBR उतना ही नहीं, बल्कि नया प्लूटोनियम-239 ईंधन भी तैयार करता है। इस तरह जितना ईंधन खर्च होता है, उससे कहीं अधिक नया ईंधन बनता है।
भारत का परमाणु कार्यक्रम तीन चरणों में डिजाइन किया गया था, जिसके जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा हैं। पहला चरण PHWR रिएक्टरों का है, जो वर्तमान में संचालित हैं। PFBR इस कार्यक्रम का दूसरा चरण है, जो भारत को स्वदेशी परमाणु ईंधन उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में आगे ले जाएगा। तीसरे चरण में थोरियम आधारित रिएक्टर शामिल हैं, जो भारत के पास उपलब्ध दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडार का उपयोग कर भविष्य में बिजली उत्पादन करेंगे।
भारत अब परमाणु ऊर्जा में दबदबा बनाएगा
भारत के पास दुनिया के लगभग 25% थोरियम भंडार हैं। PFBR रिएक्टर की सफलता से यह खजाना भविष्य में बिजली उत्पादन का स्रोत बन जाएगा। भारत ने 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जो PFBR के बिना असंभव था।
कलपक्कम PFBR के चालू होने के बाद भारत दुनिया का दूसरा देश बन गया है, जिसके पास कॉमर्शियल फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है। अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे देश भी इस तकनीक के विकास में भारत के पीछे हैं, और कुछ प्रोजेक्ट बीच में ही बंद कर चुके हैं। इस सफलता से भारत न केवल ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भी परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अपना दबदबा बनाएगा।
स्वदेशी तकनीक से बनी शक्ति
PFBR रिएक्टर पूरी तरह भारत में डिज़ाइन और निर्मित किया गया है, जिसमें 200 से अधिक भारतीय लघु उद्योगों का योगदान है। 500 MW क्षमता वाला यह रिएक्टर भारत के ‘नेट जीरो 2070’ लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा। यह रिएक्टर 24 घंटे बिजली प्रदान कर सकता है, जो न केवल सोलर और विंड ऊर्जा से संभव है, बल्कि देश की ऊर्जा जरूरतों को स्थायी और स्वच्छ तरीके से पूरा करेगा।
इस तकनीक के साथ भारत ने न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की है, बल्कि थोरियम और प्लूटोनियम के भविष्य के भंडार के माध्यम से देश की परमाणु महाशक्ति बनने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। PFBR रिएक्टर भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र में एक नया युग लेकर आया है।








