बोकारो जिले के काशी झरिया गांव के हेमंत कुमार ने पारंपरिक खेती से अलग कुछ नया करने का निर्णय लिया और 30 डिसमिल में तालाब बनाकर पंगास मछली पालन शुरू किया। उन्होंने बताया कि परिवार में पीढ़ियों से खेती होती रही है, लेकिन कुछ अलग करने की चाह ने उन्हें मछली पालन की ओर प्रेरित किया। पंगास मछली तेजी से बढ़ती है और केवल तीन महीने में डेढ़ किलो तक पहुंच जाती है, जिससे यह छोटे तालाब में भी उच्च मुनाफा देने वाला व्यवसाय बन गया है। हेमंत का अनुभव यह दर्शाता है कि सही तकनीक और देखभाल से पंगास मछली पालन बहुत लाभकारी साबित हो सकता है।
पंगास मछली पालन की लागत और मुनाफा
हेमंत ने बताया कि पंगास मछली के स्पॉन की कीमत थोक में केवल 3 रुपये प्रति पीस है। उन्होंने शुरुआती चरण में 3000 स्पॉन का प्रयोग किया। मछली पालन में रोजाना लगभग 5 किलो फीड की आवश्यकता होती है और तीन महीने में कुल फीड की खपत लगभग 450 किलो होती है। कुल लागत में फीड, दवा और अन्य खर्च मिलाकर लगभग 1 लाख रुपये आते हैं। औसत मृत्यु दर को ध्यान में रखते हुए, लगभग 2000 मछलियों की बिक्री से तीन महीने में दो लाख रुपये तक की आमदनी संभव है। हेमंत अपनी मछलियों को बोकारो के सेक्टर 5 और चास इलाके में बेचते हैं।
सही मौसम और तकनीक से सफल पंगास मछली पालन
हेमंत का कहना है कि पंगास मछली पालन में मौसम की बड़ी भूमिका है। सर्दियों में मछलियां अधिक संवेदनशील हो जाती हैं। इसलिए पानी के तापमान, ऑक्सीजन स्तर और फीड की नियमित निगरानी आवश्यक है। यदि किसान सही तकनीक और जानकारी के साथ पालन करें, तो यह व्यवसाय उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। हेमंत की सलाह है कि छोटे तालाब में भी लगातार देखभाल और सही प्रबंधन से मछली पालन लाभकारी और स्थायी व्यवसाय बन सकता है।
मछली पालन से बदल रही किसानों की जिंदगी
बोकारो के हेमंत कुमार की कहानी यह दिखाती है कि पंगास मछली पालन केवल मुनाफे का जरिया नहीं, बल्कि किसानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति बदलने वाला विकल्प है। पारंपरिक खेती के साथ यह नया व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। हेमंत के अनुभव से साफ है कि अगर किसान सही मार्गदर्शन और मेहनत के साथ पंगास मछली पालन करें, तो उनकी आय और जीवनस्तर दोनों में सुधार संभव है।
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