मेरठ: देश को दहला देने वाले चर्चित ‘नीले ड्रम हत्याकांड’ में अदालत ने बुधवार को ऐतिहासिक और बेहद सख्त फैसला सुनाया है। मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या कर उसके शव के टुकड़े नीले ड्रम में सीमेंट से सील करने वाले दोनों दोषियों, मुस्कान और साहिल शुक्ला को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने फांसी की सजा सुनाई है। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में कोर्ट की एक खास टिप्पणी ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
‘दंड भी धर्म है’: महाभारत के श्लोक से कोर्ट की दो टूक
फैसला सुनाने से पहले जब जज अदालत कक्ष में पहुंचे, तो वहां मौजूद हर शख्स की सांसें थमी हुई थीं। कार्यवाही शुरू करते हुए जज ने एक बेहद गहरी और अहम टिप्पणी की— ‘दंड भी धर्म है’। महाभारत का उदाहरण देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि जब अपराध क्रूरता की हर सीमा को लांघ जाए, तब समाज में संतुलन और न्याय स्थापित करने के लिए दोषियों को सजा देना ही सबसे बड़ा धर्म बन जाता है। कोर्ट के इस कड़े रुख ने साफ कर दिया कि जघन्य अपराधों के लिए कानून में नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है।
क्या था पूरा मामला और कैसे हुआ खुलासा?
यह खौफनाक वारदात मार्च 2025 की है, जब मर्चेंट नेवी में कार्यरत सौरभ राजपूत की उनकी अपनी पत्नी मुस्कान और उसके साथी साहिल शुक्ला ने साजिश के तहत हत्या कर दी थी। कातिलों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए सौरभ के शव के कई टुकड़े किए और उन्हें एक नीले ड्रम में भरकर ऊपर से सीमेंट से पक्का कर दिया ताकि किसी को शक न हो। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी और गहन छानबीन के बाद इस सनसनीखेज राज से पर्दा उठ गया और दोनों आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच गए।
30 सितंबर को ठहराया गया था दोषी, बुधवार को आया अंतिम फैसला
मेरठ की जिला अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई पूरी करते हुए गत 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल को हत्या का दोषी करार दिया था। इसके बाद से ही पूरे देश की निगाहें सजा के ऐलान पर टिकी हुई थीं। बुधवार को अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों और सबूतों को पूरी तरह पुख्ता मानते हुए दोनों को फांसी के फंदे पर लटकाने का अंतिम आदेश जारी कर दिया। अदालत के इस फैसले को न्याय की जीत के रूप में देखा जा रहा है।







