सिद्धार्थनगर में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने हर किसी की सांसें थाम दीं। यहां कुछ किशोर एक ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गए थे, लेकिन बाद में नीचे उतरने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा। धीरे-धीरे हालात इतने गंभीर हो गए कि वे करीब 16 घंटे तक वहीं फंसे रहे। रातभर अंधेरा, ऊंचाई का डर और नीचे उतरने का कोई साधन नहीं—इन सबके बीच किशोरों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। आसपास के लोग भी परेशान थे और प्रशासन से जल्द से जल्द मदद की मांग कर रहे थे।
बारिश बनी बाधा, सड़क बनाकर पहुंचने की कोशिश नाकाम
शुरुआत में प्रशासन ने जमीन के रास्ते से किशोरों तक पहुंचने की योजना बनाई। टंकी के दोनों ओर से अस्थायी रास्ता बनाने का काम भी शुरू कर दिया गया था, ताकि बचाव दल ऊपर तक पहुंच सके। लेकिन देर रात अचानक मौसम खराब हो गया और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण मिट्टी धंसने लगी और रास्ता बनाना मुश्किल हो गया। हालात को देखते हुए अधिकारियों ने समझ लिया कि जमीन से पहुंचना संभव नहीं है। इसके बाद तुरंत बड़ा फैसला लेते हुए सेना की मदद मांगी गई।
हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू, 15 मिनट में पूरा ऑपरेशन
रविवार सुबह करीब 5:20 बजे भारतीय वायु सेना का हेलीकॉप्टर गोरखपुर से घटनास्थल पर पहुंचा। इसके बाद बेहद सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। हेलीकॉप्टर को टंकी के ऊपर स्थिर रखना आसान नहीं था, लेकिन प्रशिक्षित जवानों ने यह काम बखूबी किया। करीब 15 मिनट तक चले इस ऑपरेशन में सभी किशोरों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रेस्क्यू के दौरान नीचे भारी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे और हर पल स्थिति पर नजर बनाए हुए थे।
सफल रेस्क्यू के बाद राहत, अधिकारियों ने की तारीफ
जैसे ही किशोरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, पूरे इलाके में राहत की लहर दौड़ गई। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने सेना और रेस्क्यू टीम की जमकर सराहना की। किशोरों को हेलीकॉप्टर के जरिए गोरखपुर ले जाया गया, जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने यह दिखा दिया कि आपात स्थिति में सही समय पर लिया गया फैसला कितनी बड़ी जान बचा सकता है। प्रशासन ने भी माना कि अगर हेलीकॉप्टर की मदद नहीं ली जाती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
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