कानपुर किडनी कांड: नोटों के बिस्तर पर सोते थे आरोपी, वीडियो ने खोली हैरान करने वाली सच्चाई

उत्तर प्रदेश के कानपुर में पकड़े गए किडनी रैकेट ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। इस मामले में अब एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने जांच को नया मोड़ दे दिया है। वायरल वीडियो में मुख्य आरोपी अफजल और परवेज एक होटल के कमरे में बेड पर लेटे दिखाई दे रहे हैं, जहां उनके आसपास लाखों रुपये के नोटों की गड्डियां बिखरी पड़ी हैं। यह दृश्य साफ तौर पर बताता है कि इस अवैध धंधे में किस स्तर पर पैसों का खेल चल रहा था। पुलिस के अनुसार, यह वीडियो इस रैकेट की कमाई और इसके पीछे छिपे बड़े नेटवर्क का संकेत देता है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह कारोबार लंबे समय से संगठित तरीके से चल रहा था और इसमें कई लोग शामिल थे

परवेज शैफी की भूमिका और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड

जांच में परवेज शैफी की भूमिका बेहद अहम बताई जा रही है। वह इस पूरे नेटवर्क का लॉजिस्टिक्स संभालता था, यानी डॉक्टरों और अन्य लोगों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का इंतजाम करता था। पुलिस के मुताबिक, परवेज पहले भी कई गंभीर मामलों में जेल जा चुका है, जिनमें लूट और डकैती जैसे अपराध शामिल हैं। इस रैकेट में उसकी जिम्मेदारी दिल्ली और गाजियाबाद से विशेषज्ञों की टीम को कानपुर तक पहुंचाने की थी। यह भी सामने आया है कि वह हर ऑपरेशन से पहले पूरी योजना बनाता था और टीम के लिए गाड़ियां और ठहरने की व्यवस्था करता था। इससे साफ होता है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक संगठित और प्रोफेशनल नेटवर्क था।

पुलिस की कार्रवाई और बढ़ती जांच का दायरा

कानपुर पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपियों को एक अस्पताल से गिरफ्तार किया था। इसके बाद से लगातार जांच जारी है और नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस आयुक्त के अनुसार, जिन लोगों को शुरुआत में डॉक्टर समझा जा रहा था, वे असल में योग्य चिकित्सक नहीं थे। इनमें तकनीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य लोग शामिल हैं, जो खुद को डॉक्टर बताकर इस अवैध काम में लगे हुए थे। फिलहाल चार मुख्य आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश में कई टीमों को लगाया गया है। पुलिस अब दिल्ली और गाजियाबाद में भी छापेमारी कर रही है ताकि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों को पकड़ा जा सके। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

आधी कीमत में किडनी दिलाने का खेल और मरीजों के साथ धोखा

इस रैकेट का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि इसमें एक बिचौलिया मरीजों और दाताओं को जोड़ने का काम करता था। यह व्यक्ति बाजार से लगभग आधी कीमत पर किडनी दिलाने का दावा करता था, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोग इसके जाल में फंस जाते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड तैयार किए जाते थे और मरीजों को बड़े अस्पतालों में भेजा जाता था। एक मामले में तो एक महिला की अवैध प्रत्यारोपण के बाद मौत भी हो गई थी, जिसे छिपाने के लिए उसे दूसरे इलाज के नाम पर शिफ्ट किया गया। पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क के तार कुछ बड़े अस्पतालों और प्रभावशाली लोगों से भी जुड़े हो सकते हैं। अब जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके और दोषियों को सख्त सजा मिल सके।

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