मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान और इजरायल के बीच हालिया हमलों के बाद दुनिया भर में सुरक्षा हालात को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच भारत ने अपनी हवाई सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करने का ऐलान किया है। सरकार का कहना है कि बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए देश की एयर कैपिबिलिटी को आधुनिक तकनीक और नए संसाधनों से लैस किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम भविष्य की संभावित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है ताकि भारत हर परिस्थिति में अपनी सीमाओं और हितों की रक्षा कर सके।
आधुनिक फाइटर जेट और ड्रोन पर फोकस
सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायुसेना के बेड़े में नए अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल किए जाने की योजना है। पहले से ही Indian Air Force अपने बेड़े को आधुनिक बनाने पर काम कर रही है। स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर विदेशी सहयोग भी लिया जाएगा। इसके अलावा एयर सर्विलांस और रडार सिस्टम को भी और मजबूत करने की तैयारी है। माना जा रहा है कि इससे देश की हवाई निगरानी और जवाबी कार्रवाई की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
क्यों अहम है यह फैसला?
ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक सुरक्षा और तेल बाजार पर भी पड़ रहा है। भारत जैसे बड़े देश के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह किसी भी अनिश्चित स्थिति के लिए तैयार रहे। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि एयर पावर किसी भी देश की सैन्य ताकत की रीढ़ होती है। ऐसे में भारत का यह फैसला रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। इससे न केवल सीमाओं की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
सरकार ने साफ किया है कि एयर कैपिबिलिटी बढ़ाने के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया जाएगा। स्वदेशी लड़ाकू विमान और मिसाइल सिस्टम के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले समय में रक्षा बजट में भी इस दिशा में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर, वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत का यह कदम देश की सुरक्षा रणनीति को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।
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