10 रुपये के लिए प्रेस करता था कपड़े, IT का 598 करोड़ का नोटिस देख अस्पताल पहुंचा शख्स! जानें क्या है मामला

राजस्थान के अजमेर से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि आम जनता को भी हैरान कर दिया है। अजमेर के रामनगर क्षेत्र में जितेंद्र बाड़ोलिया नाम का एक व्यक्ति छोटी सी गुमटी में ₹10 प्रति जोड़ी के हिसाब से कपड़े प्रेस करके अपने परिवार का पेट पालता है। एक दिन अचानक जितेंद्र के दरवाजे पर इनकम टैक्स विभाग का एक नोटिस पहुंचा, जिसे खोलते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। विभाग ने उससे ₹598 करोड़ के भारी-भरकम ट्रांजैक्शन का हिसाब मांगा था। इस नोटिस को देखते ही जितेंद्र की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उनका शुगर लेवल 500 के पार चला गया और ब्लड प्रेशर (BP) भी खतरनाक स्तर तक बढ़ गया। एक गरीब मेहनतकश इंसान, जो दिन भर की मेहनत के बाद चंद रुपये कमाता है, उसके लिए करोड़ों का यह आंकड़ा किसी बुरे सपने से कम नहीं था।

हीरे-जवाहरात का फर्जी खेल: कागजों पर बना ‘अरबपति’

इनकम टैक्स द्वारा भेजे गए इस नोटिस में जिस ट्रांजैक्शन का जिक्र था, वह हीरे और जवाहरात के कारोबार से जुड़ा हुआ था। जितेंद्र ने घबराकर तुरंत वकील से संपर्क किया और अपनी स्थिति स्पष्ट की। जांच में पता चला कि आयकर विभाग ने ‘मैसर्स मनन इंटरप्राइजेज’ नाम की एक फर्म के जरिए हुए करोड़ों के लेनदेन पर यह नोटिस जारी किया है। हैरानी की बात यह है कि कागजों पर जितेंद्र इस फर्म का मालिक बताया गया था, जबकि हकीकत में उसे हीरे के व्यापार की एबीसीडी भी नहीं पता। जितेंद्र का कहना है कि उसने कभी सपने में भी इतनी बड़ी रकम नहीं देखी, फिर वह इतना बड़ा व्यापार कैसे कर सकता है? इस घटना ने यह साफ कर दिया कि किसी शातिर दिमाग अपराधी ने जितेंद्र की पहचान चुराकर उसे इस फर्जीवाड़े का चेहरा बना दिया था।

खोया हुआ पैन कार्ड और पहचान की चोरी का जाल

मामले की तह तक जाने पर एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ। जितेंद्र के वकील राकेश ठाडा ने बताया कि करीब दो साल पहले जितेंद्र का पैन कार्ड (PAN Card) कहीं खो गया था। आशंका जताई जा रही है कि इसी खोए हुए दस्तावेज़ का गलत इस्तेमाल कर किसी ने जितेंद्र के नाम पर फर्जी बैंक खाता खुलवाया। इतना ही नहीं, उसी पैन कार्ड और अन्य पहचान पत्रों के आधार पर जीएसटी (GST) नंबर भी अलॉट करा लिया गया। शुरुआती जांच में पाली के एक डायमंड कारोबारी की संलिप्तता सामने आ रही है, जिसने सूरत (गुजरात) में जितेंद्र के नाम पर फर्म खोली और महज तीन महीनों के भीतर ₹600 करोड़ के आसपास का ट्रांजैक्शन कर डाला। यह पूरा खेल इतनी सफाई से खेला गया कि बैंक को भी इसकी भनक नहीं लगी, या फिर मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

पुलिस की कार्रवाई और बैंकिंग प्रणाली पर उठते सवाल

इस धोखाधड़ी के खिलाफ अब अजमेर के गंज थाना पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है। पुलिस ने पूरे नेटवर्क को खंगालना शुरू कर दिया है और इस बड़े फ्रॉड के पीछे छिपे असली चेहरों की तलाश की जा रही है। वहीं, इनकम टैक्स विभाग ने उस बैंक मैनेजर को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जहां यह करोड़ों का लेनदेन हो रहा था। सवाल यह खड़ा होता है कि जब नियम के अनुसार इतने बड़े ट्रांजैक्शन की सूचना समय पर दी जानी चाहिए थी, तो बैंक ने लापरवाही क्यों बरती? फिलहाल, जितेंद्र डरे हुए हैं और सदमे में हैं, लेकिन उनकी शिकायत के बाद अब पुलिस और जांच एजेंसियां गुजरात से लेकर राजस्थान तक फैले इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने में जुट गई हैं। यह मामला हर आम आदमी के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि अपने निजी दस्तावेजों की सुरक्षा कितनी जरूरी है।

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