राजस्थान के डीग जिला अस्पताल से सामने आए एक हैरान कर देने वाले वीडियो ने सोशल मीडिया पर सनसनी फैला दी है। वीडियो में एक बुजुर्ग व्यक्ति अपनी बीमार पत्नी को साइकिल के कैरियर पर बैठाकर सीधे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड तक ले जाते दिख रहे हैं। इलाज कराने के बाद वह उसी तरह अपनी पत्नी को साइकिल पर बैठाकर बाहर ले जाते हैं। अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की सुविधा मौजूद होने के बावजूद यह घटना हुई है। वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और पार्किंग की सुविधाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अस्पताल परिसर में दोपहिया वाहन तक पहुंच रहे मरीज
स्थानीय निवासियों और मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल में पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसी कारण लोग अपनी स्कूटी, बाइक और यहां तक कि साइकिल को सीधे वार्ड तक ले जाते हैं। स्थानीय निवासी सुरेश का कहना है, “अस्पताल परिसर में पार्किंग की कोई पुख्ता जगह नहीं है। डॉक्टर, कर्मचारी और मरीज सभी को अपनी गाड़ियां बाहर सड़क पर खड़ी करनी पड़ती हैं। गार्ड न होने के कारण लोग मौका पाकर वाहन अंदर घुसा देते हैं।”
इससे न केवल अस्पताल की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि मरीजों और तीमारदारों के लिए भी जोखिम बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि चोरी और अन्य सुरक्षा चिंताओं के चलते यह कदम उठाना उनकी मजबूरी बन गई है।
अस्पताल प्रशासन ने जताई बेबसी, उठा कदम
डीग जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. जितेंद्र फौजदार ने कहा कि अस्पताल में इस तरह की घटनाएं अक्सर देखने को मिलती हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि लोग अपनी बाइक और साइकिल तक अंदर ले आते हैं। डॉ. फौजदार ने कहा, “यह बुजुर्ग अपनी पत्नी को दिखाने अक्सर आते रहते हैं। उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि उन्हें मोटरसाइकिल चोरी जैसी घटनाओं का डर है। फिलहाल इस मामले में बुजुर्ग के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।”
अस्पताल प्रशासन ने यह भी बताया कि सुरक्षा गार्ड और पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विचार किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि जल्द ही सुधार के प्रयास शुरू किए जाएंगे ताकि मरीज और तीमारदार सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से अस्पताल का उपयोग कर सकें।
सुरक्षा और सुविधा दोनों की आवश्यकता
अस्पताल में सुरक्षा और पार्किंग जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं की कमी, मरीजों और तीमारदारों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। सुरक्षा न होने और चोरी का डर होने के कारण मरीज परिवार ऐसी असामान्य परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। इस मामले ने न केवल अस्पताल प्रशासन के लिए चुनौती पैदा की है, बल्कि आम जनता के लिए भी एक चेतावनी संदेश है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि अस्पताल परिसर में पर्याप्त गार्ड तैनात किए जाएं और मरीजों के लिए सुरक्षित पार्किंग का प्रबंध किया जाए। इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि इस तरह की अनोखी और जोखिम भरी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।








