इलाज के नाम पर भाई ने रची खौफनाक साजिश? दृष्टिहीन भाई को जंगल में छोड़कर हुआ फरार, फिर…

ओडिशा के केओंझर जिले से सामने आई एक घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। रिश्तों में भरोसे और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करने वाली इस घटना में एक दृष्टिहीन युवक को उसके ही बड़े भाई ने कथित तौर पर इलाज के बहाने घर से दूर ले जाकर घने जंगल में छोड़ दिया। मामला केओंझर जिले के तेलकोई थाना क्षेत्र का है, जहां बिंझाबहाल गांव के पास स्थित हनुमान वाटिका के जंगल में स्थानीय लोगों ने एक युवक को बेहद कमजोर और बदहवास हालत में देखा। युवक भूख और प्यास से परेशान था और लगातार मदद की गुहार लगा रहा था। ग्रामीणों ने तुरंत मानवता दिखाते हुए उसे पानी और भोजन दिया तथा पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से युवक को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उसका इलाज शुरू किया गया।

पत्नी के हमले के बाद चली गई आंखों की रोशनी

अस्पताल में इलाज के दौरान युवक ने अपनी पहचान छत्तीसगढ़ निवासी संजय मिश्रा के रूप में बताई। संजय ने बताया कि कुछ महीने पहले घरेलू विवाद के दौरान उसकी पत्नी ने उस पर तेजाब फेंक दिया था। इस हमले में उसकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई और वह पूरी तरह दृष्टिहीन हो गया। घटना के बाद उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। उसने बताया कि आंखों की रोशनी खोने के बाद उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई। शारीरिक और मानसिक रूप से टूट चुके संजय के लिए जीवन काफी कठिन हो गया था। ऐसे समय में उसे अपने परिवार, खासकर बड़े भाई का सहारा मिलने की उम्मीद थी।

जिस भाई पर भरोसा किया, उसी पर छोड़ने का आरोप

संजय का आरोप है कि उसके बड़े भाई ने बेहतर इलाज कराने का भरोसा देकर उसे अपने साथ ओडिशा लाया था। वह भाई की बातों पर विश्वास कर उसके साथ चला आया, क्योंकि उसे लगा कि शायद इलाज से उसकी हालत में सुधार हो सकेगा। लेकिन ओडिशा पहुंचने के बाद उसका भाई उसे एक सुनसान और घने जंगल में छोड़कर वहां से फरार हो गया। दृष्टिहीन होने के कारण संजय को यह भी समझ नहीं आया कि वह किस जगह पर है और किस दिशा में मदद मांगे। कई घंटों तक वह जंगल में भटकता रहा और आवाज लगाकर लोगों से मदद मांगता रहा। यदि समय रहते ग्रामीण वहां नहीं पहुंचते, तो उसकी जान भी जा सकती थी।

पुलिस कर रही जांच, परिवार की तलाश शुरू

मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि युवक के बयान के आधार पर उसके परिवार और भाई की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसे किन परिस्थितियों में जंगल में छोड़ा गया। पुलिस छत्तीसगढ़ पुलिस से भी संपर्क कर रही है, ताकि युवक के परिजनों तक पहुंचा जा सके। फिलहाल संजय का इलाज जारी है और उसकी स्थिति में सुधार बताया जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर बुजुर्गों, दिव्यांगों और असहाय लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि मुश्किल समय में अपनों का साथ कितना जरूरी होता है और भरोसे का टूटना किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा दर्द बन सकता है।

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