भारतीय सीमाओं पर तनाव के बीच अब अंतरिक्ष से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान अब जमीन के रास्ते ही नहीं, बल्कि आसमान से चुपचाप भारत की घेराबंदी करने में जुट गया है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान ने बेहद शांत तरीके से अंतरिक्ष में भारत की जासूसी करने का एक खतरनाक नेटवर्क तैयार कर लिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान की इस नई ‘अंतरिक्ष चाल’ के पीछे चीन खड़ा है। चीन की मदद से पाकिस्तान ने पिछले कुछ ही महीनों के भीतर अंतरिक्ष में वो ताकत हासिल कर ली है, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।
दशकों से सुस्त पड़ी पाकिस्तानी एजेंसी ने अचानक चली बड़ी चाल
पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी ‘सुपार्को’ (SUPARCO) की स्थापना भारत की इसरो (ISRO) से भी पहले हुई थी, लेकिन कई सालों तक यह एजेंसी पूरी तरह सुस्त पड़ी रही। लेकिन जनवरी 2025 से लेकर अप्रैल 2026 के बीच, यानी महज 16 महीनों के भीतर पाकिस्तान ने अचानक एक के बाद एक कुल 6 नए ‘अर्थ-ऑब्जर्वेशन’ (जमीन पर नजर रखने वाले) सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़ दिए हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कोई आम सैटेलाइट नहीं हैं, जिनका इस्तेमाल मौसम की जानकारी के लिए होता है। इन्हें विशेष रूप से भारतीय सेना की गतिविधियों और देश के मुख्य ठिकानों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने के लिए ही अंतरिक्ष में सेट किया गया है।
लोहे और कपड़े का अंतर भी पहचान लेते हैं ये खतरनाक सैटेलाइट
अंतरिक्ष में भेजे गए इन छह सैटेलाइट्स की ताकत साधारण कैमरों से कहीं ज्यादा खतरनाक है। पाकिस्तान का एक सैटेलाइट है ‘HS-1’, जो जमीन पर मौजूद अलग-अलग चीजों के बीच का अंतर आसानी से पहचान सकता है। इसका मतलब यह है कि अगर भारतीय सेना ने सीमा पर अपने हथियारों, टैंकों या बंकरों को छुपाने के लिए किसी कपड़े या जाली (नेट) का इस्तेमाल किया है, तो यह सैटेलाइट उसे भी आसानी से पकड़ लेगा। इसके अलावा, पाकिस्तान के नए सैटेलाइट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) यानी कंप्यूटर के दिमाग का इस्तेमाल किया गया है, जो भारतीय सीमा में होने वाले छोटे से छोटे बदलाव की जानकारी तुरंत पाकिस्तानी सेना को दे देते हैं।
चीन की मदद से भारत के ‘सरप्राइज प्लान’ को फेल करने की कोशिश
पाकिस्तान के पास खुद इतनी बड़ी तकनीक बनाने की ताकत नहीं है, इसलिए इस पूरी साजिश के पीछे चीन का हाथ है। इन सभी सैटेलाइट्स को न सिर्फ चीन के रॉकेटों से अंतरिक्ष में भेजा गया है, बल्कि इन्हें बनाने में भी चीन ने पैसा और दिमाग लगाया है। भारतीय नौसेना के पूर्व रियर एडमिरल सुधीर पिल्लई के मुताबिक, इन सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में जिस तरह घुमाया जा रहा है, उससे साफ है कि इनका एकमात्र मकसद भारत के परमाणु ठिकानों, मिसाइल सेंटर्स और सैन्य ठिकानों की जासूसी करना है। पाकिस्तान और चीन की कोशिश यह है कि अगर भविष्य में भारत कोई अचानक कदम (सरप्राइज एक्शन) उठाना चाहे, तो उन्हें उसकी भनक पहले ही लग जाए।








