छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक कार निर्माता कंपनी और उसके डीलर के खिलाफ सख्त फैसला सुनाते हुए ग्राहक के पक्ष में आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा है कि यदि कंपनी तय समय के भीतर ग्राहक को उसी मॉडल की नई और E20 पेट्रोल के अनुकूल कार उपलब्ध नहीं कराती है, तो उसे पूरी खरीद राशि ब्याज सहित वापस करनी होगी। इस फैसले को E20 पेट्रोल से जुड़े विवादों में देश के शुरुआती महत्वपूर्ण निर्णयों में माना जा रहा है। अदालत का मानना है कि ग्राहक को उत्पाद से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देना कंपनी की जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही नहीं बरती जा सकती।
नई कार खरीदने के बाद लगातार आने लगीं दिक्कतें
मामला रायपुर के एक डॉक्टर से जुड़ा है, जिन्होंने वर्ष 2024 में एक नई कार खरीदी थी। कार खरीदने के कुछ समय बाद ही उसमें तकनीकी समस्याएं आने लगीं। शिकायत के अनुसार वाहन का इंजन बार-बार बंद हो रहा था और गाड़ी के प्रदर्शन में लगातार गिरावट देखने को मिल रही थी। जब ग्राहक वाहन को सर्विस सेंटर लेकर पहुंचे तो उन्हें वारंटी के तहत मुफ्त मरम्मत देने से इनकार कर दिया गया। कंपनी की ओर से बताया गया कि पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल की वजह से इंजन प्रभावित हुआ है और यह वारंटी की शर्तों के अंतर्गत नहीं आता। इसके बाद ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और पूरे मामले की सुनवाई शुरू हुई।
जांच में सामने आईं ऐसी बातें, जिन्होंने बदल दिया पूरा मामला
सुनवाई के दौरान आयोग के सामने कई ऐसे तथ्य आए, जिन्होंने मामले की दिशा बदल दी। जांच में पता चला कि ग्राहक को जो कार बेची गई थी, उसका निर्माण वाहन खरीदने से काफी पहले किया गया था। इसके अलावा यह भी सामने आया कि वाहन का इंजन E20 पेट्रोल के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं था। अदालत ने माना कि वर्तमान समय में कई पेट्रोल पंपों पर E20 ईंधन उपलब्ध है और ग्राहक के पास यह नियंत्रित करने का विकल्प नहीं होता कि उसे किस प्रकार का पेट्रोल मिले। ऐसे में यदि वाहन उस ईंधन के अनुकूल नहीं है तो इसकी स्पष्ट जानकारी पहले से दी जानी चाहिए थी। आयोग ने माना कि जरूरी जानकारी साझा न करना उपभोक्ता के साथ अन्याय की श्रेणी में आता है।
कंपनी को नई कार या पूरी रकम लौटाने का आदेश
उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी और डीलर 45 दिनों के भीतर ग्राहक को उसी मॉडल की नई E20 कंपैटिबल कार उपलब्ध कराएं। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो वाहन की कीमत, पंजीकरण और बीमा सहित पूरी राशि ग्राहक को लौटानी होगी। इसके साथ ही भुगतान पर निर्धारित ब्याज भी देना होगा। आयोग ने मानसिक परेशानी के लिए अलग से मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। साथ ही यह निर्णय वाहन खरीदने वाले ग्राहकों के अधिकारों और कंपनियों की जिम्मेदारियों को लेकर भी बड़ा संदेश देता है। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद वाहन कंपनियां ग्राहकों को तकनीकी जानकारी देने में और अधिक सावधानी बरत सकती हैं।
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