अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुई सीजफायर पर अजमेर दरगाह के प्रमुख सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने प्रतिक्रिया दी। चिश्ती ने कहा कि यह सीजफायर पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है कि अगर हौसले बुलंद हों तो बड़ी से बड़ी ताकत भी झुक सकती है। उनके अनुसार, ईरान ने इस युद्ध में अपनी वीरता और जज्बे से साबित कर दिया कि जुल्म के आगे झुका नहीं जाता, बल्कि डटकर सामना किया जाता है।
महायुद्ध से बिगड़े वैश्विक हालात
सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने बताया कि इस युद्ध से पूरी दुनिया के हालात खराब हो रहे थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब सीजफायर से स्थिति में सुधार आएगा। चिश्ती ने अयातुल्लाह अली खामेनेई और ईरान के लोगों के जज्बे को मिसाल बताते हुए कहा कि उनकी हिम्मत ने पूरी दुनिया को दिखा दिया कि बड़ी ताकतों के सामने भी साहस और हौसला काम कर सकता है।
ट्रंप और UN को लेकर तंज
चिश्ती ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके बयानों में निरंतर असंगति रही और इस युद्ध में अमेरिका को झुकना पड़ा। इसके साथ ही उन्होंने UN जैसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठाया और कहा कि बड़ी शक्तियों के दबाव के बावजूद उनकी कोशिशें असफल रहीं। उनका कहना था कि अमेरिका और इजरायल ने नियमों की अवहेलना की और इस युद्ध का हर्जाना उन्हें भुगतना चाहिए।
जज्बा और हौसले की जीत
नसीरुद्दीन चिश्ती ने सीजफायर को ईरान की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया कि हौसले और साहस से बड़ी ताकतों को भी झुकाया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब दुनिया में स्थिरता आएगी और संघर्षों के बावजूद न्याय और हिम्मत की मिसाल कायम रहेगी। उनका संदेश साफ था – जुल्म के आगे झुकना नहीं, बल्कि डटकर खड़ा होना ही असली जीत है।








