अहमदाबाद विमान हादसे को एक साल पूरा हो गया है। इस मौके पर कई पीड़ित परिवार एक बार फिर उस जगह पहुंचे, जहां उनका सब कुछ हमेशा के लिए खत्म हो गया था। क्रैश साइट पर माहौल बेहद भावुक था। लोगों की आंखों में आंसू थे और दिल में अपने खोए हुए अपनों की यादें ताज़ा हो गईं। समय बीत गया है, लेकिन दर्द आज भी वैसा ही ताजा है जैसा उस हादसे के दिन था।
खेड़ा के रजनीकांत और पुष्पाबेन की दर्दनाक कहानी
गुजरात के खेड़ा जिले के रहने वाले रजनीकांत दर्जी और उनकी पत्नी पुष्पाबेन इस हादसे का सबसे दुखद उदाहरण बन गए। यह उनकी जिंदगी की पहली हवाई यात्रा थी। वे अपने बेटे से मिलने और उसके साथ यूके में नया जीवन शुरू करने जा रहे थे। बेटे ने डॉक्टर बनकर विदेश में सफलता हासिल की थी और वह अपने माता-पिता को अपने साथ रखने का सपना पूरा करना चाहता था। लेकिन यह खुशी का सफर कभी पूरा नहीं हो सका।
एक सपना जो अधूरा रह गया
रजनीकांत और पुष्पाबेन ने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए जीवनभर मेहनत की थी। बेटे ने उसी मेडिकल परिसर से पढ़ाई की थी, जहां बाद में यह भयानक हादसा हुआ। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह यूके चला गया और वहां बस गया। उसने अपने माता-पिता को बुलाने की पूरी तैयारी कर ली थी, टिकट से लेकर सभी इंतजाम खुद किए थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, और उनकी पहली हवाई यात्रा ही आखिरी बन गई।
बरसी पर परिवार का दर्द और भावनाएं
हादसे की पहली बरसी पर रजनीकांत के परिवार के सदस्य एक बार फिर क्रैश साइट पर पहुंचे और अपने प्रियजनों को याद करते हुए भावुक हो गए। वहां मौजूद परिजनों ने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। परिवार के सदस्य प्रमोदभाई ने बताया कि यह घटना उनके पूरे परिवार को तोड़कर रख गई है। उन्होंने कहा कि माता-पिता ने अपने बेटे को बड़ा करने के लिए बहुत संघर्ष किया, लेकिन उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सफर ही उनका आखिरी सफर बन गया।
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