दिल्ली-NCR में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एक छापेमारी के दौरान ऐसा मामला सामने आया जिसने पूरी एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि छापेमारी के दौरान टीम में शामिल एक अधिकारी ने मौके से 1 लाख रुपये की नकदी गायब कर दी। यह कार्रवाई एक निजी व्यक्ति के घर पर चल रही जांच के दौरान हुई थी, जहां टीम सबूत जुटाने पहुंची थी। आरोप के अनुसार, अधिकारी ने नकदी को छिपाने के लिए उसे एक वाहन की फ्लोर मैट के नीचे रख दिया, ताकि किसी को शक न हो। इस घटना के सामने आते ही पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया और जांच टीम के भीतर ही हलचल मच गई।
गवाह की गवाही से खुला पूरा मामला
मामले की जांच में उस समय बड़ा मोड़ आया जब मौके पर मौजूद एक स्वतंत्र गवाह ने दावा किया कि उसने आरोपी अधिकारी को नकदी छिपाते हुए देखा था। गवाह के बयान के आधार पर बाद में तलाशी ली गई, जिसमें कथित तौर पर वही 1 लाख रुपये वाहन की मैट के नीचे से बरामद हुए। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि बरामदगी के बाद आरोपी अधिकारी ने दूसरे CBI अधिकारियों के सामने अपना जुर्म स्वीकार भी कर लिया था। इस पूरे घटनाक्रम ने जांच एजेंसी की पारदर्शिता और आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोर्ट की टिप्पणी और जमानत का आधार
राउज एवेन्यू कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि इस मामले में जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अदालत ने रिकॉर्ड के आधार पर कहा कि सभी प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को जब्त कर फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेज दिया गया है और कथित रूप से चोरी की गई रकम भी बरामद हो चुकी है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आरोपी कई वर्षों से CBI में कार्यरत है और उसके फरार होने की संभावना नहीं दिखाई देती। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने माना कि अब आरोपी को हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है और उसे जमानत दी जा सकती है।
जमानत की शर्तें और आगे की कार्रवाई
अदालत ने आरोपी अधिकारी को 50-50 हजार रुपये के दो निजी मुचलकों और जमानती बॉन्ड पर जमानत प्रदान की है। साथ ही उसे दिल्ली-NCR से बाहर जाने के लिए अदालत की अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आरोपी अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करेगा, किसी भी गवाह से संपर्क नहीं करेगा, सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा और आवश्यकता पड़ने पर जांच में सहयोग करेगा। इस मामले में आगे की सुनवाई और ट्रायल के दौरान यह तय होगा कि आरोप सिद्ध होते हैं या नहीं, लेकिन फिलहाल यह मामला CBI जैसी शीर्ष जांच एजेंसी की छवि पर एक बड़ा सवाल छोड़ गया है।
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