‘उनका जीवन देश के लिए अनमोल है…’ सोनम वांगचुक की हालत देख भावुक हुए अखिलेश यादव, बीजेपी के खिलाफ खोला मोर्चा!

देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर इस समय एक बड़े आंदोलन और उससे भी बड़े संकट का गवाह बन रहा है। लद्दाख की पर्यावरण और लोकतांत्रिक मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रख्यात शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा साझा की गई मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 16 दिनों से अन्न का एक दाना न लेने के कारण वांगचुक का वजन करीब 8.2 किलोग्राम तक गिर चुका है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि उनका ब्लड ग्लूकोज स्तर गिरकर 67 mg/dL पर पहुंच गया है, जो चिकित्सा के दृष्टिकोण से बेहद खतरनाक माना जाता है। इस बिगड़ते स्वास्थ्य ने न केवल उनके समर्थकों, बल्कि देश के राजनीतिक गलियारों में भी खलबली मचा दी है।

अखिलेश यादव की भावुक अपील: ‘आपका जीवन सिर्फ देश नहीं, पूरी दुनिया के लिए अनमोल’

सोनम वांगचुक की इस नाजुक स्थिति को देखते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक बेहद भावुक पोस्ट साझा की है। अखिलेश यादव ने वांगचुक से अपना आमरण अनशन तुरंत समाप्त करने का विनम्र आग्रह किया। उन्होंने लिखा कि सोनम वांगचुक जैसी शख्सियत का जीवन केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे विश्व के लिए एक धरोहर है। वांगचुक के भीतर मानवता, पर्यावरण संरक्षण और लोकतंत्र के प्रति जो अद्भुत समर्पण है, उसकी जरूरत देश को आगे भी रहेगी। सपा प्रमुख ने जोर देकर कहा कि इस लड़ाई को जिंदा रखने के लिए वांगचुक का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है, ताकि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और प्रकाश स्तंभ बने रहें।

सत्ताग्रह बनाम सत्याग्रह: सपा प्रमुख का भाजपा सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला

इस भावुक अपील के साथ ही अखिलेश यादव ने केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने सरकार पर ‘सिद्धांतहीन, भ्रष्ट और असंवेदनशील’ होने का आरोप लगाया। अखिलेश यादव ने तीखे शब्दों में कहा कि जो सरकार सत्ता और धन के अहंकार में डूबी हुई है, वह किसी के त्याग, तपस्या या जीवन की कीमत को क्या समझेगी। उन्होंने ‘सत्याग्रह’ और ‘सत्ताग्रह’ की तुलना करते हुए लिखा कि जिन्हें सिर्फ सत्ता का लालच है, वे युवाओं के भविष्य, उनके परिवारों के सपनों और देश की लोकतांत्रिक आवाजों के प्रति पूरी तरह उदासीन हो चुके हैं। इस बयान ने लद्दाख आंदोलन के इर्द-गिर्द जारी राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

क्या पिघलेगी सरकार या बढ़ेगा गतिरोध? प्रदर्शनकारियों ने दी चेतावनी

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े प्रदर्शनकारियों और सीजेपी (CJP) के नेताओं ने सरकार को कड़ा संदेश दिया है। उनका कहना है कि लद्दाख की सुरक्षा, वहां के पर्यावरण और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर जो मांगें उठाई जा रही हैं, उन पर सरकार को तुरंत और ठोस फैसला लेना चाहिए। वांगचुक के समर्थकों का मानना है कि उनकी नैतिक शक्ति और मनोबल हर सच्चे भारतीय को आंदोलित कर रहा है, लेकिन प्रशासन की चुप्पी बेहद निराशाजनक है। अब देखना यह होगा कि अखिलेश यादव और देश के अन्य बड़े नेताओं की अपीलों के बाद क्या सोनम वांगचुक अपना अनशन तोड़ते हैं, या फिर सरकार की तरफ से बातचीत की कोई नई पहल शुरू होती है।

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