हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे गाने बने हैं जिन्होंने रिलीज के साथ ही लोगों के दिलों में जगह बना ली, लेकिन कुछ गाने ऐसे भी रहे जिन पर विवाद इतना बढ़ गया कि उन्हें प्रतिबंध तक झेलना पड़ा। 1993 में आई फिल्म ‘खलनायक’ का मशहूर गाना ‘चोली के पीछे क्या है’ भी उन्हीं में से एक है। इस गाने को अपनी अलग और दमदार आवाज देने वाली गायिका इला अरुण ने उस दौर में ऐसा जादू चलाया कि गाना आज भी शादियों, पार्टियों और महफिलों में पूरे जोश के साथ बजता है। हालांकि जब यह गाना रिलीज हुआ था, तब इसके बोलों को लेकर काफी विवाद हुआ और इसे अश्लील तक कहा गया। विवाद इतना बढ़ा कि उस समय के सबसे बड़े सरकारी टीवी चैनल दूरदर्शन ने इस गाने के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद गाने की लोकप्रियता कम नहीं हुई और धीरे-धीरे यह बॉलीवुड के सबसे चर्चित गीतों में शामिल हो गया।
इला अरुण की अनोखी आवाज ने बनाया गाने को यादगार
राजस्थान की लोक संस्कृति से जुड़ी आवाज रखने वाली इला अरुण का जन्म 15 मार्च 1954 को जोधपुर में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थानी लोक संगीत से की, लेकिन जल्द ही उनकी अनोखी और भारी आवाज ने बॉलीवुड संगीतकारों का ध्यान खींच लिया। फिल्म ‘खलनायक’ में जब ‘चोली के पीछे क्या है’ गाना रिकॉर्ड हुआ तो इसे इला अरुण और अल्का याज्ञनिक ने मिलकर गाया था। इस गाने को पर्दे पर माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया और उनकी शानदार डांस परफॉर्मेंस ने इसे और भी ज्यादा लोकप्रिय बना दिया। गाने के बोल और अंदाज उस समय के लिए काफी बोल्ड माने गए, लेकिन इसकी धुन और लोक संगीत की झलक ने लोगों को इतना आकर्षित किया कि यह गीत कुछ ही दिनों में सुपरहिट हो गया। इला अरुण को इस गाने के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला, जो उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।
‘अश्लीलता’ के आरोप लगे, मगर इला अरुण ने दिया अलग जवाब
जब ‘चोली के पीछे क्या है’ रिलीज हुआ तो कई सामाजिक संगठनों और दर्शकों ने इसके बोलों को लेकर आपत्ति जताई। कुछ लोगों का मानना था कि यह गीत समाज में गलत संदेश देता है, इसलिए इसे सार्वजनिक मंचों पर गाने से रोकने की मांग भी उठी। विवाद इतना बढ़ गया कि इला अरुण से कई कार्यक्रमों में यह गाना न गाने की सलाह दी जाने लगी। हालांकि इला अरुण ने हमेशा इस आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि यह गीत अश्लील नहीं बल्कि भारतीय लोक संस्कृति से प्रेरित है। उनके मुताबिक राजस्थान और उत्तर भारत के कई लोकगीतों में इसी तरह के प्रतीक और संवाद मिलते हैं, जिन्हें ग्रामीण जीवन की सहज अभिव्यक्ति माना जाता है। समय के साथ लोगों का नजरिया भी बदला और आज यही गाना बॉलीवुड के सबसे यादगार डांस नंबरों में गिना जाता है।
गायकी के साथ अभिनय में भी बनाया अलग मुकाम
इला अरुण सिर्फ गायिका ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन अभिनेत्री भी हैं। उन्होंने कई फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में मजबूत किरदार निभाए हैं। फिल्म ‘जोधा अकबर’ में उनका निभाया गया किरदार ‘महाम अंगा’ काफी चर्चित रहा। इसके अलावा ‘चाइना गेट’, ‘चिंगारी’, ‘वेलकम टू सज्जनपुर’, ‘वेल डन अब्बा’ और ‘बेगम जान’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने यादगार सहायक भूमिकाएं निभाईं। संगीत के क्षेत्र में भी उन्होंने कई लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज दी, जिनमें ‘मोरनी बागा मा बोले’, ‘गुप चुप गुप चुप’ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ का गाना ‘रिंगा रिंगा’ शामिल है। टीवी की दुनिया में भी उनका योगदान कम नहीं रहा। उन्होंने ‘भारत एक खोज’, ‘यात्रा’ और ‘संविधान’ जैसे धारावाहिकों में काम कर अपनी पहचान बनाई। लोक संगीत से लेकर बॉलीवुड तक का उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा और मेहनत के दम पर कलाकार हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकता है।
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