हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री और सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) की अध्यक्ष पूनम ढिल्लों इस समय स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। खबरों के अनुसार, उन्हें डेंगू बुखार हुआ है, जिसके चलते उन्हें मुंबई के प्रतिष्ठित लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पूनम ढिल्लों के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आते ही मनोरंजन जगत और उनके प्रशंसकों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है। अस्पताल के सूत्रों और उनके करीबी लोगों का कहना है कि अभिनेत्री की हालत अब स्थिर है और वे धीरे-धीरे रिकवरी की ओर बढ़ रही हैं। हालांकि, उनके बीमार होने का समय बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि इस वक्त CINTAA के भीतर मचे आंतरिक घमासान को लेकर अभिनेत्री पर भारी दबाव था। फैंस लगातार सोशल मीडिया पर उनके जल्द ठीक होने की प्रार्थना कर रहे हैं और उनके स्वास्थ्य अपडेट पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
CINTAA के भीतर मचा है भारी सियासी घमासान
पूनम ढिल्लों की बीमारी के साथ ही CINTAA का विवाद फिर से सुर्खियों के केंद्र में आ गया है। इस प्रतिष्ठित संगठन के अंदर चल रहे तनाव ने अब एक बड़ा रूप ले लिया है। संगठन की महासचिव उपासना सिंह ने पूनम ढिल्लों और उपाध्यक्ष पद्मिनी कोल्हापुरे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उपासना का आरोप है कि संगठन में लोकतांत्रिक मूल्यों की कमी है और जो भी सदस्य नेतृत्व के फैसलों से असहमति जताते हैं, उन्हें ‘कारण बताओ नोटिस’ जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। इस विवाद ने तब गंभीर मोड़ ले लिया जब हाल ही में आठ वरिष्ठ सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वाले सदस्यों में हेमंत पांडे, मुकेश ऋषि, साहिला चड्ढा और पुनीत इस्सर जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन इस्तीफों ने संगठन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे अभिनेत्री के लिए परिस्थितियां और कठिन हो गई हैं।
पावर सेंट्रलाइजेशन का आरोप और पारदर्शिता पर सवाल
विवाद की मुख्य जड़ ‘पावर सेंट्रलाइजेशन’ को बताया जा रहा है। इस्तीफा देने वाले सदस्यों और उपासना सिंह का यह आरोप है कि पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे के पास संगठन के अहम फैसलों का नियंत्रण जरूरत से ज्यादा केंद्रित हो गया है। उपासना का दावा है कि संगठन के कामकाज में पारदर्शिता का अभाव है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण आधिकारिक संवाद के लिए व्यक्तिगत ईमेल आईडी का उपयोग करना है। उनका तर्क है कि यदि संगठन के आधिकारिक ईमेल सर्वर का इस्तेमाल हो, तो रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और कामकाज में जवाबदेही बढ़ेगी। संगठन के 1958 में स्थापना के बाद से यह शायद पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर आंतरिक विद्रोह देखने को मिल रहा है, जिसने पूनम ढिल्लों की साख और उनके अध्यक्ष पद की भूमिका को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।
पूनम ढिल्लों का पलटवार और भविष्य की चुनौतियां
इन आरोपों के बीच पूनम ढिल्लों ने काफी संयमित रवैया अपनाया है। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि वे इस मामले में सार्वजनिक तौर पर कीचड़ उछालने या किसी विवाद का हिस्सा बनने में विश्वास नहीं रखतीं। उनका मानना है कि उन पर लगाए जा रहे आरोप उस व्यक्ति की व्यक्तिगत निराशा और ध्यान आकर्षित करने की चाहत का नतीजा हैं। अभिनेत्री ने यह भी साफ किया कि संगठन के भीतर उपासना सिंह को हमेशा महासचिव के पद के अनुरूप पूरा सम्मान और महत्व दिया गया है। फिलहाल, अभिनेत्री अपने स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, लेकिन अस्पताल से बाहर निकलने के बाद उनके सामने CINTAA के इस बिखराव को थामने और संगठन को फिर से एकजुट करने की बहुत बड़ी चुनौती होगी। फैंस और इंडस्ट्री के लोग अब यह उम्मीद कर रहे हैं कि पूनम ढिल्लों जल्द स्वस्थ होकर लौटें और इस विवाद का कोई सम्मानजनक समाधान निकालें।







