गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर राजस्थान के बाड़मेर जिला कार्यालय में पारंपरिक तरीके से राष्ट्रीय ध्वज फहराने का आयोजन किया गया था। इस समारोह में जिले की कलेक्टर और चर्चित IAS अधिकारी टीना डाबी ने झंडा फहराया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चे, प्रशासनिक अधिकारी और आम नागरिक मौजूद थे। समारोह सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन झंडा फहराने के तुरंत बाद एक ऐसा पल आया, जिसने पूरे आयोजन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। झंडा फहराने के बाद सलामी देने के दौरान टीना डाबी कुछ क्षणों के लिए असमंजस में दिखाई दीं। यही वह क्षण था, जिसे किसी ने अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया और बाद में सोशल मीडिया पर साझा कर दिया।
वायरल वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिख रहा है कि झंडा फहराने के बाद टीना डाबी सलामी देने के लिए मुड़ती हैं, लेकिन उनका चेहरा तिरंगे की दिशा में नहीं होता। कुछ सेकंड के लिए वह गलत दिशा में सलामी देती नजर आती हैं। इसी दौरान पीछे खड़े एक सुरक्षा कर्मी उन्हें हाथ के इशारे से सही दिशा की ओर ध्यान दिलाते हैं। इसके बाद टीना डाबी तुरंत अपनी स्थिति सुधार लेती हैं। यह पूरा दृश्य कुछ ही पलों का है, लेकिन वीडियो वायरल होते ही इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे प्रोटोकॉल से जुड़ी गलती बताया, तो कुछ ने इसे बेहद सामान्य मानवीय चूक करार दिया।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया और बहस
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ और अन्य नेटवर्क्स पर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से ऐसी भूल कैसे हो सकती है। वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने टीना डाबी का समर्थन भी किया। समर्थकों का कहना है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में काम के दबाव और लगातार जिम्मेदारियों के बीच ऐसी छोटी-मोटी गलतियां किसी से भी हो सकती हैं। कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि कुछ सेकंड की चूक को जरूरत से ज्यादा तूल दिया जा रहा है। खबर लिखे जाने तक टीना डाबी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
भला हो सुरक्षाकर्मी का…वीडियो बाड़मेर से है…गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ… pic.twitter.com/UQZXDB4r75
— Vivek Shrivastava (@Viveksbarmeri) January 26, 2026
प्रोटोकॉल, दबाव और मानवीय भूल का सवाल
प्रशासनिक अधिकारियों से आमतौर पर प्रोटोकॉल और नियमों की पूरी जानकारी की उम्मीद की जाती है, क्योंकि वे ही आम जनता के लिए उदाहरण होते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में मानसिक दबाव, समय की पाबंदी और मंच पर मौजूदगी के कारण ऐसी छोटी भूलें हो सकती हैं। यह घटना भी उसी श्रेणी में देखी जा रही है। बाड़मेर में हुआ यह वाकया अब एक प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर सोशल मीडिया बहस का विषय बन चुका है। जहां एक ओर आलोचना हो रही है, वहीं दूसरी ओर लोग इसे सामान्य मानवीय त्रुटि मानकर आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं।
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