सुरों के आंगन में पसरा सन्नाटा: थम गई 12000 गानों को आवाज देने वाली वो जादुई धड़कन? करोड़ों फैंस की आंखें नम!

Asha Bhosle: भारतीय संगीत जगत का एक सुनहरा अध्याय आज हमेशा के लिए समाप्त हो गया। अपनी खनकती आवाज से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली ‘आशा ताई’ यानी आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। शनिवार रात को अचानक कार्डियक अरेस्ट आने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की है। जैसे ही यह खबर फैली, पूरी फिल्म इंडस्ट्री और संगीत की दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई। हर कोई उस जादुई आवाज के मौन हो जाने से स्तब्ध है, जिसने पीढ़ियों को संगीत का सही अर्थ समझाया था।

 शिवाजी पार्क में होगा अंतिम संस्कार

आशा भोसले के अंतिम सफर को लेकर प्रशासनिक और पारिवारिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उनके बेटे आनंद भोसले ने जानकारी दी कि प्रशंसकों और शुभचिंतकों के अंतिम दर्शन के लिए उनका पार्थिव शरीर कल (सोमवार) सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक उनके लोअर परेल स्थित आवास ‘कासा ग्रांडे’ में रखा जाएगा। इसके बाद, शाम 4 बजे मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनकी पोती जनाई भोसले, जो इस कठिन समय में उनके साथ थीं, उन्होंने भी भावुक संदेश साझा करते हुए अपनी दादी को याद किया। प्रशासन को उम्मीद है कि अपनी प्रिय गायिका को अंतिम विदाई देने के लिए भारी संख्या में जनसैलाब उमड़ सकता है, जिसे देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

 16 की उम्र में बगावत और फिर संगीत की दुनिया पर राज

8 सितंबर 1933 को जन्मी आशा भोसले का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने परिवार के खिलाफ जाकर गणपतराव भोसले से शादी की थी, लेकिन वह रिश्ता उन्हें गहरे जख्म दे गया। हालांकि, इन व्यक्तिगत मुश्किलों ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। 10 साल की उम्र से गाना शुरू करने वाली आशा जी ने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की छाया से बाहर निकलकर अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली और गुजराती सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में 12,000 से अधिक गानों को अपनी आवाज दी। ‘पिया तू अब तो आजा’ के चुलबुलेपन से लेकर ‘दिल चीज क्या है’ की संजीदगी तक, उन्होंने हर विधा में खुद को साबित किया। आर डी बर्मन (पंचम दा) के साथ उनकी जोड़ी ने संगीत को नए आयाम दिए, जो आगे चलकर उनकी जीवनसंगिनी भी बने।

 दादासाहेब फाल्के और पद्म विभूषण से सुसज्जित सफर

आशा भोसले मात्र एक गायिका नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की एक वैश्विक पहचान थीं। उनके इसी अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें ‘दादासाहेब फाल्के पुरस्कार’ और देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पॉड विभूषण’ से नवाजा था। उनके गाए गाने जैसे ‘दम मारो दम’, ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ और ‘इन आंखों की मस्ती के’ आज भी रिमिक्स के दौर में अपनी मौलिकता बनाए हुए हैं। संगीत विशेषज्ञों का मानना है कि आशा जी की आवाज में वो लचीलापन था जो शास्त्रीय संगीत से लेकर आधुनिक पॉप तक को बड़ी सहजता से छू लेता था। उनके निधन से संगीत के एक ऐसे ‘वर्सेटाइल’ युग का अंत हो गया है, जिसकी भरपाई कभी मुमकिन नहीं होगी। सुरों की ये रानी आज भले ही खामोश हो गई हो, लेकिन उनके गाने युगों-युगों तक गूंजते रहेंगे।

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