Tuesday, February 17, 2026

‘लोग मुझे मूर्ख समझते थे…’ आखिर कौन सी बीमारी से जूझते रहे सनी देओल? खुद किया बड़ा खुलासा

बॉलीवुड के दमदार एक्शन हीरो सनी देओल ने हाल ही में अपनी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा सच साझा किया, जिसने उनके फैंस को चौंका दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही डिस्लेक्सिया नाम की समस्या थी। उस समय इस बीमारी को लेकर समाज में जागरूकता बहुत कम थी, इसलिए लोग उनकी परेशानी को समझ नहीं पाते थे। स्कूल के दिनों में पढ़ाई के दौरान उन्हें शब्द पढ़ने और समझने में दिक्कत होती थी। कई बार शिक्षक और सहपाठी उन्हें कमजोर या कम समझदार मान लेते थे। सनी देओल ने कहा कि जब कोई बच्चा पढ़ाई में पीछे रह जाता है तो समाज जल्दी से उसे ‘मूर्ख’ का टैग दे देता है, जबकि असल कारण कुछ और भी हो सकता है। उस दौर में न तो सही गाइडेंस मिल पाई और न ही इस समस्या का सही इलाज। लेकिन उन्होंने कभी खुद को कमतर नहीं माना और धीरे-धीरे अपनी ताकत पहचानना शुरू किया।

क्या है डिस्लेक्सिया और क्यों होता है गलतफहमी का शिकार?

डिस्लेक्सिया एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें व्यक्ति को पढ़ने, लिखने और शब्दों को समझने में कठिनाई होती है। यह किसी की बुद्धि या समझदारी से जुड़ा नहीं होता, बल्कि दिमाग के काम करने के तरीके से संबंधित होता है। सनी देओल ने बताया कि उन्हें स्क्रिप्ट पढ़ने में समय लगता था और कई बार डायलॉग याद करने में भी परेशानी होती थी। फिल्म इंडस्ट्री में जहां तेजी और परफेक्शन की उम्मीद की जाती है, वहां इस तरह की समस्या कई बार चुनौती बन जाती है। उन्होंने कहा कि लोग यह नहीं समझ पाते थे कि उनकी परेशानी जानबूझकर नहीं है। कई बार उन्हें अपनी बात समझाने का मौका भी नहीं मिलता था। आज के समय में डिस्लेक्सिया को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। इसी वजह से कई बच्चे और युवा बिना समझे-बूझे आलोचना का सामना करते रहे हैं।

संघर्ष से सुपरस्टार तक का सफर

मुश्किलों के बावजूद सनी देओल ने अपने करियर में कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी कमजोरी को ताकत में बदलने की कोशिश की। डायलॉग याद करने के लिए वे अलग तरीका अपनाते थे, बार-बार रिहर्सल करते थे और सीन को महसूस करके निभाते थे। यही वजह है कि उनकी फिल्मों में भावनाएं और गुस्सा इतनी सच्चाई से नजर आता है। उनकी दमदार आवाज और स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। एक दौर ऐसा भी आया जब उन्होंने लगातार हिट फिल्में दीं और एक्शन हीरो के रूप में मशहूर हो गए। उनके करियर का सफर इस बात का उदाहरण है कि अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी कमी रास्ता नहीं रोक सकती। उन्होंने यह भी कहा कि अब जब लोग डिस्लेक्सिया के बारे में जानते हैं, तो बच्चों को पहले की तरह गलत नहीं समझा जाना चाहिए। सही मार्गदर्शन और समर्थन मिले तो कोई भी बच्चा आगे बढ़ सकता है।

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)

समाज के लिए एक जरूरी संदेश

सनी देओल का यह खुलासा सिर्फ उनकी निजी कहानी नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी है। अक्सर हम किसी व्यक्ति को उसकी पढ़ाई या बोलने के तरीके से जज कर लेते हैं। लेकिन हर व्यक्ति की सीखने की क्षमता और तरीका अलग होता है। डिस्लेक्सिया जैसी स्थितियां यह साबित करती हैं कि प्रतिभा केवल किताबों के अंकों से नहीं मापी जा सकती। जरूरत है संवेदनशीलता और समझ की। अगर माता-पिता और शिक्षक समय रहते समस्या पहचान लें, तो बच्चे को सही दिशा दी जा सकती है। सनी देओल ने अपने अनुभव साझा कर यह दिखाया है कि संघर्ष से घबराने के बजाय उसे स्वीकार कर आगे बढ़ना चाहिए। आज वे लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनका जीवन बताता है कि असली ताकत आत्मविश्वास और मेहनत में होती है, न कि दूसरों की राय में।

Read More-मोदी-मैक्रों की बड़ी डील! भारत में बनेगा ऐसा हेलीकॉप्टर जो छुएगा आसमान की आखिरी सीमा

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img