Saturday, January 17, 2026

अर्शदीप सिंह को बेंच पर क्यों बैठाया गया? आर अश्विन का फूटा गुस्सा, टीम इंडिया मैनेजमेंट पर उठे बड़े सवाल

भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाना हमेशा आसान नहीं रहा है। हर खिलाड़ी को कड़ी प्रतिस्पर्धा से गुजरना पड़ता है, लेकिन जब कोई खिलाड़ी लगातार अच्छा प्रदर्शन करता है और फिर भी उसे बिना ठोस वजह के प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा जाता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह के साथ कुछ ऐसा ही देखने को मिला। न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले और दूसरे वनडे मैच में उन्हें टीम में मौका नहीं दिया गया, जबकि वह पिछले कुछ समय से टीम के लिए भरोसेमंद गेंदबाज साबित हुए हैं। इसी फैसले को लेकर भारत के अनुभवी ऑफ स्पिनर और मौजूदा क्रिकेट विश्लेषक आर अश्विन ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की है। अपने यूट्यूब शो में अश्विन ने सीधे तौर पर टीम इंडिया के मैनेजमेंट पर सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार अच्छा करने वाले खिलाड़ी को बेंच पर बैठाना किसी भी तरह से सही संदेश नहीं देता। उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक खिलाड़ी का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरी चयन प्रक्रिया और खिलाड़ियों के मनोबल से जुड़ा मुद्दा है।

अश्विन क्यों हुए आग-बबूला, क्या है असली वजह

आर अश्विन का मानना है कि अर्शदीप सिंह जैसे गेंदबाज को लंबे समय तक बेंच पर बैठाए रखना गलत रणनीति है। टीम मैनेजमेंट की ओर से यह तर्क दिया गया कि हर्षित राणा और प्रसिद्ध कृष्णा को मैच प्रैक्टिस देना जरूरी था, लेकिन अश्विन इस सोच से सहमत नहीं दिखे। उन्होंने साफ कहा कि मैच प्रैक्टिस देना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पहले से तैयार और भरोसेमंद खिलाड़ी को नजरअंदाज कर दिया जाए। अश्विन ने यह भी कहा कि अगर कोई गेंदबाज लगातार मैच नहीं खेलेगा, तो वह “रस्‍टी” हो सकता है, यानी उसकी लय और आत्मविश्वास पर असर पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि चयन के दौरान खिलाड़ी की मानसिक स्थिति के बारे में क्यों नहीं सोचा जाता। अश्विन के मुताबिक, अक्सर ऐसे फैसले गेंदबाजों के साथ होते हैं, बल्लेबाजों के साथ कम देखने को मिलते हैं। यह असंतुलन भी टीम के भीतर गलत संदेश देता है और खिलाड़ियों को असमंजस में डालता है।

‘क्रिकेट आत्मविश्वास का खेल है’, अनुभव से बोले अश्विन

अपने अनुभव के आधार पर अश्विन ने कहा कि क्रिकेट सिर्फ तकनीक या फिटनेस का खेल नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास का खेल है। अगर कोई खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद टीम से बाहर बैठता है, तो उसका आत्मविश्वास गिरना तय है। अश्विन ने यह भी माना कि वह खुद अपने करियर में इस तरह के दौर से गुजर चुके हैं, इसलिए वह खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति को बेहतर तरीके से समझते हैं। उन्होंने कहा कि जब खिलाड़ी को शुरुआत से भरोसा मिलता है, तभी वह मैदान पर खुलकर प्रदर्शन कर पाता है। अर्शदीप सिंह के मामले में अश्विन का मानना है कि उन्हें लगातार मौके मिलने चाहिए थे, ताकि वह अपनी लय और आत्मविश्वास बनाए रख सकें। उन्होंने यह भी इशारा किया कि अगर एक खिलाड़ी को बार-बार बाहर बैठाया जाता है, तो उसके मन में यह सवाल आने लगता है कि आखिर उससे गलती कहां हो रही है, जबकि आंकड़े और प्रदर्शन उसके पक्ष में होते हैं।

टी20 वर्ल्ड कप की तैयारी या मैनेजमेंट की चूक

कुछ क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अर्शदीप सिंह को आने वाले टी20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए आराम दिया जा रहा है। हालांकि, अश्विन इस तर्क से भी पूरी तरह सहमत नहीं दिखे। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में अर्शदीप टी20 फॉर्मेट में भी पूरी तरह “ऑटोमैटिक चॉइस” नहीं रह गए हैं, खासकर नए कोचिंग सेटअप के बाद। ऐसे में उन्हें लगातार मैच खिलाकर आत्मविश्वास देना और भी जरूरी हो जाता है। अश्विन ने यह भी कहा कि अगर अर्शदीप को तीसरे वनडे में मौका दिया जाता है, तो भी पहले दो मैच बाहर बैठाने का नुकसान पूरी तरह खत्म नहीं होता। खिलाड़ी को यह भरोसा शुरुआत से मिलना चाहिए कि टीम उस पर विश्वास करती है। अंत में अश्विन ने साफ शब्दों में कहा कि अर्शदीप सिंह ने जब-जब टीम इंडिया के लिए गेंद थामी है, उन्होंने जिम्मेदारी के साथ प्रदर्शन किया है।

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