बिलासपुर की रहने वाली सुनैना मधुमटके की कहानी आज उन हजारों महिलाओं के लिए मिसाल बन रही है, जो घर की चारदीवारी में रहकर अपने सपनों को दबा देती हैं. एक सामान्य गृहणी के रूप में जीवन बिताने वाली सुनैना ने कभी नहीं सोचा था कि वह एक दिन खुद का छोटा सा व्यवसाय शुरू करेंगी. पति की आमदनी सीमित थी और बच्चों की पढ़ाई व भविष्य की चिंता लगातार बढ़ रही थी. ऐसे में उन्होंने घर बैठे चिंता करने के बजाय खुद कुछ करने का फैसला लिया. यही फैसला उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया. सुनैना ने यह साबित कर दिया कि आत्मनिर्भर बनने के लिए बड़े निवेश या डिग्री की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है.
कंपनी गार्डन के पास शुरू हुआ मिक्स फ्रूट मॉडल
सुनैना ने बिलासपुर के कंपनी गार्डन के पास मिक्स फ्रूट बेचने का काम शुरू किया. रोज सुबह वह बाजार से ताजे फल जैसे केला, सेब, अनार, मौसंबी, अंगूर आदि खरीदती हैं. घर पर फलों को अच्छे से धोकर, साफ-सुथरे तरीके से काटती हैं और फिर मसाले के साथ आकर्षक डिब्बों में पैक करती हैं. उनका खास ध्यान साफ-सफाई और स्वाद पर रहता है, जिसकी वजह से ग्राहक एक बार खरीदने के बाद दोबारा जरूर आते हैं. शुरुआत में लोगों को यह छोटा सा स्टॉल सामान्य लगा, लेकिन कुछ ही दिनों में यहां भीड़ लगने लगी. वॉक पर आने वाले लोग, बच्चे और परिवार सभी उनके मिक्स फ्रूट को पसंद करने लगे.
छोटा दाम, बड़ी कमाई का फॉर्मूला
सुनैना अपने मिक्स फ्रूट का एक डिब्बा सिर्फ ₹30 में बेचती हैं. कम कीमत होने के कारण बच्चे आसानी से खरीद लेते हैं और स्वाद पसंद आने पर दोबारा भी आते हैं. रोजाना 60 से ज्यादा डिब्बों की बिक्री हो जाती है, जिससे उनकी कुल दैनिक बिक्री ₹1200 से ₹1300 तक पहुंच जाती है. खास बात यह है कि यह सब उन्होंने महज एक सप्ताह में हासिल किया है. उनका कहना है कि अगर मौसम और ग्राहक इसी तरह बने रहे तो आने वाले समय में वह बिक्री और बढ़ा सकती हैं. इस छोटे से बिजनेस मॉडल में जोखिम कम है और मुनाफा स्थिर, जो इसे और खास बनाता है.
आने वाले समय में बड़ा करने की तैयारी
सुनैना मधुमटके आज सिर्फ एक मिक्स फ्रूट विक्रेता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की एक जीवंत मिसाल बन चुकी हैं. वह कहती हैं कि अगर महिलाओं को थोड़ा सा भी सहयोग और हौसला मिले, तो वे घर और बाहर दोनों संभाल सकती हैं. आने वाले समय में वह अपने स्टॉल को और बेहतर बनाना चाहती हैं और अलग-अलग फ्लेवर के हेल्दी फूड आइटम जोड़ने की योजना बना रही हैं. सुनैना की यह कहानी साबित करती है कि मेहनत, ईमानदारी और सही सोच से कोई भी महिला अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है. बिलासपुर की यह गृहणी आज कई महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है.
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