केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट 2026-27 पेश किए जाने के बाद देशभर में इस पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कोई इसे भविष्य की मजबूत नींव बता रहा है तो कोई इसे आम आदमी की उम्मीदों से दूर मान रहा है। इसी बीच BharatPe के पूर्व फाउंडर और शार्क टैंक इंडिया से चर्चित हुए अशनीर ग्रोवर ने बजट पर ऐसा बयान दे दिया, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी।
अशनीर ग्रोवर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बजट को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे ‘बिल्कुल टाइम वेस्ट’ करार दिया। उन्होंने लिखा कि यह बजट उन्हें शार्क टैंक इंडिया में किसी कमजोर पिचर को दी गई अपनी फटकार की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वक्त भी बर्बाद हुआ और सामने वाले का भी। उनका यह बयान सामने आते ही तेजी से वायरल होने लगा और देखते ही देखते हजारों लोग इस पर अपनी राय देने लगे।
‘लंबा प्रेजेंटेशन, असर कम’, शार्क टैंक की पिच से की बजट की तुलना
अशनीर ग्रोवर ने अपने पोस्ट में सीधे तौर पर बजट की प्रस्तुति पर सवाल उठाए। उन्होंने संकेत दिया कि बजट का प्रेजेंटेशन भले ही लंबा और विस्तार से भरा हो, लेकिन उसमें वह दम नजर नहीं आया, जो देश की अर्थव्यवस्था और उद्यमिता को लेकर ठोस बदलाव दिखा सके। शार्क टैंक इंडिया में अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर अशनीर अक्सर उन पिचर्स को फटकार लगाते दिखे हैं, जिनके आइडिया उन्हें कमजोर लगते थे।
बजट को उसी कमजोर पिच से जोड़ते हुए उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि सरकार ने काफी समय और शब्द खर्च किए, लेकिन नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। अशनीर के इस बयान को कई लोग सरकार की नीतियों पर सीधी टिप्पणी मान रहे हैं, तो कुछ इसे एक उद्यमी के नजरिए से आई निराशा बता रहे हैं। खास बात यह है कि अशनीर ग्रोवर का यह रिएक्शन ऐसे समय आया है, जब बजट को लेकर पहले ही देश में दो ध्रुवों में बंटी राय देखने को मिल रही है।
सोशल मीडिया पर तीखी बहस
अशनीर ग्रोवर के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स के कमेंट्स की झड़ी लग गई। कुछ लोगों ने उनके बयान से सहमति जताई और कहा कि बजट में आम आदमी और स्टार्टअप्स के लिए तत्काल राहत कम नजर आती है। एक यूजर ने लिखा कि बजट सुनकर उन्हें भी लगा कि काफी बातें कही गईं, लेकिन जमीन पर असर कब दिखेगा, यह साफ नहीं है।
वहीं, कुछ यूजर्स ने मजाकिया और तंज भरे अंदाज में प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने लिखा कि ऐसा लगता है जैसे अशनीर किसी नई जांच को न्योता दे रहे हों। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि हर बजट को सिर्फ शॉर्ट टर्म फायदे के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। कुल मिलाकर, अशनीर ग्रोवर का बयान एक ट्रिगर की तरह काम कर गया, जिसने बजट 2026 को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया। यह साफ हो गया कि बजट सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भावनाओं और अपेक्षाओं से भी जुड़ा मुद्दा बन चुका है।
बजट 2026 पर उठते सवाल
अगर बजट 2026 की घोषणाओं पर नजर डालें तो यह साफ होता है कि सरकार ने तुरंत राहत देने के बजाय लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर ज्यादा फोकस किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने, स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजिकल मिशन को मजबूत करने और मिडिल क्लास को टैक्स में कुछ राहत देने की बात इस बजट में की गई है। सरकार का तर्क है कि इन कदमों से आने वाले वर्षों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
हालांकि, अशनीर ग्रोवर जैसे उद्यमियों और आम लोगों के एक वर्ग का मानना है कि मौजूदा समय में महंगाई, रोजगार और कारोबार से जुड़ी परेशानियों पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत थी। यही वजह है कि बजट को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या लंबी दूरी की तैयारी के चक्कर में वर्तमान की समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया गया है। अशनीर का ‘टाइम वेस्ट’ वाला बयान इसी असंतोष को आवाज देता नजर आता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन आलोचनाओं का किस तरह जवाब देती है और बजट 2026 का असर जमीनी स्तर पर कब और कैसे दिखता है।
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