महिला आरक्षण और परिसीमन पर दिवाली से पहले बड़ा फैसला? संसद के विशेष सत्र को लेकर बढ़ी हलचल

महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार संसद में एक बार फिर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। चर्चा है कि दिवाली से पहले संसद का दो से तीन दिनों का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। इस बैठक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने तथा परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी सत्र की तारीखों और कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार कब तक अंतिम फैसला लेती है और क्या इस बार विधेयकों को संसद की मंजूरी मिल पाएगी।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर दोबारा तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, सरकार लोकसभा में अपनी संख्या को लेकर आश्वस्त है और प्रस्तावित विधेयकों के समर्थन में विपक्षी दलों से भी बातचीत कर रही है। बताया जा रहा है कि डीएमके सहित कुछ छोटे विपक्षी दलों से संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है। सरकार की रणनीति विधेयकों को दोबारा संसद में लाने से पहले पर्याप्त समर्थन जुटाने की है। दूसरी ओर, विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। ऐसे राजनीतिक माहौल में विशेष सत्र बुलाने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अप्रैल में मिली थी निराशा, अब क्या होगी अगली रणनीति?

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर सरकार को पहले भी संसद में चुनौती का सामना करना पड़ा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 17 अप्रैल को लोकसभा में संबंधित संविधान संशोधन विधेयक जरूरी समर्थन नहीं मिलने के कारण पारित नहीं हो पाया था। अब सरकार दोबारा प्रयास करने की तैयारी में है। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हुआ था, लेकिन उसका औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। ऐसे में विशेष बैठक बुलाने का रास्ता खुला बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बैठक से पहले करीब एक सप्ताह का नोटिस दिया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम कार्यक्रम तय होना बाकी है।

ब्रिक्स संसदीय कार्यक्रम के बीच तारीख पर नजर

विशेष सत्र की संभावित तारीख तय करते समय 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में होने वाले 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के कार्यक्रम को भी ध्यान में रखा जा सकता है। सरकार के सामने विधेयकों के लिए समर्थन जुटाने के साथ विपक्ष के सवालों का सामना करने की चुनौती भी रहेगी। महिला आरक्षण का मुद्दा संसद और देश की राजनीति में अहम है, जबकि परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की चिंताएं भी चर्चा का हिस्सा हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दिवाली से पहले विशेष सत्र बुलाया जाएगा या सरकार आगे की तारीख तय करेगी। आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही सत्र की तारीख और विधेयकों के एजेंडे की तस्वीर साफ होगी।

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