कल है वरुथिनी एकादशी! ये 3 आसान उपाय कर लिए तो बदल सकती है किस्मत—जानिए सही पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Varuthini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में Varuthini Ekadashi का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत Lord Vishnu को समर्पित होता है और इसे वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में रखा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार एकादशी तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल 2026 की रात लगभग 1 बजे के बाद हो रही है और इसका समापन 13 अप्रैल की रात को होगा। उदयातिथि के आधार पर यह व्रत 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 14 अप्रैल को सुबह 6:54 बजे से 8:31 बजे के बीच करना शुभ माना गया है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

क्यों खास है यह व्रत

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। कहा जाता है कि यह व्रत व्यक्ति को आर्थिक तंगी, दुख और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति दिलाता है। शास्त्रों में इसका महत्व इतना बताया गया है कि इसे करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति तक का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने और उपवास रखने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसलिए बड़ी संख्या में लोग इस व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करते हैं।

वरुथिनी एकादशी पर करें ये 3 आसान उपाय

इस खास दिन कुछ सरल उपाय करने से भगवान विष्णु की कृपा जल्दी प्राप्त होती है। पहला उपाय है गन्ने के रस से भगवान विष्णु का अभिषेक करना। मान्यता है कि इससे धन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। दूसरा उपाय है तुलसी पूजा। Tulsi को भगवान विष्णु का प्रिय माना जाता है, इसलिए इस दिन तुलसी की पूजा और तुलसी चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ होता है। तीसरा उपाय है लक्ष्मी मंत्र का जाप। ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का जाप करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। ये तीनों उपाय बेहद आसान हैं, जिन्हें कोई भी श्रद्धालु घर पर कर सकता है।

पूजा विधि और व्रत के जरूरी नियम

वरुथिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और उन्हें फूल, धूप, दीप और प्रसाद अर्पित करें। इस दिन व्रत रखने वाले लोग फलाहार करते हैं और पूरे दिन भगवान का स्मरण करते हैं। व्रत के दौरान सात्विक आहार का पालन करना चाहिए और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। अगले दिन पारण के समय व्रत खोलना चाहिए। इस तरह विधि-विधान से किया गया व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है और व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करता है।

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