हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती को समर्पित माना जाता है। हर साल माघ शुक्ल पंचमी के दिन मनाया जाने वाला यह पर्व विद्यार्थियों, कलाकारों और ज्ञान की साधना करने वालों के लिए विशेष महत्व रखता है। लेकिन साल 2026 की बसंत पंचमी सामान्य नहीं, बल्कि बेहद खास मानी जा रही है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 23 जनवरी 2026 को पड़ने वाली बसंत पंचमी पर ग्रहों की ऐसी दुर्लभ स्थिति बन रही है, जो वर्षों बाद एक साथ देखने को मिलती है।
इस दिन सूर्य, बुध, शुक्र, चंद्रमा और गुरु की स्थिति कई शुभ राजयोगों का निर्माण कर रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ऐसे योग जीवन में तरक्की, धन लाभ, शिक्षा में सफलता और मानसिक शांति देने वाले माने जाते हैं। यही कारण है कि इस बार की सरस्वती पूजा को “भाग्य बदलने वाला पर्व” भी कहा जा रहा है। मान्यता है कि जो लोग इस दिन विधि-विधान से मां सरस्वती की आराधना करते हैं, उन्हें करियर, पढ़ाई और रचनात्मक कार्यों में विशेष सफलता प्राप्त होती है।
गजकेसरी से लेकर लक्ष्मी नारायण योग तक का अद्भुत संयोग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बसंत पंचमी 2026 के दिन कुल पांच शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। सबसे पहले गजकेसरी राजयोग बनेगा, जो चंद्रमा और गुरु की विशेष स्थिति से बनता है। यह योग बुद्धि, सम्मान और आर्थिक मजबूती का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही बुध और सूर्य की युति से बुधादित्य राजयोग बनेगा, जो शिक्षा, वाणी और व्यापार में उन्नति दिलाने वाला माना जाता है।
इतना ही नहीं, सूर्य और शुक्र की युति से शुक्रादित्य राजयोग का निर्माण होगा, जो भौतिक सुख, वैवाहिक जीवन और ऐश्वर्य को बढ़ाने वाला योग माना जाता है। वहीं विष्णु और लक्ष्मी तत्व से जुड़ा लक्ष्मी नारायण राजयोग धन, समृद्धि और स्थायित्व प्रदान करता है। इन सभी योगों के अलावा इस दिन रवि योग और शिव योग का भी संयोग बन रहा है, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माने जाते हैं। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इन योगों में की गई सरस्वती पूजा जीवन की कई बाधाओं को दूर कर सकती है।
उदया तिथि के अनुसार 23 जनवरी को होगी पूजा
पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी 2026 को रात 1 बजकर 18 मिनट से होगी और इसका समापन 23 जनवरी की रात 12 बजकर 08 मिनट पर होगा। उदया तिथि को मान्यता देने के कारण बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
सरस्वती पूजा के लिए इस दिन सुबह का समय सबसे शुभ माना गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 58 मिनट से लेकर 10 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इस समय में पूजा करने से मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। विद्यार्थी इस समय किताबों और कलम की पूजा कर सकते हैं, जबकि कलाकार अपने वाद्य यंत्रों को मां के चरणों में अर्पित कर सकते हैं। कहा जाता है कि शुभ मुहूर्त में की गई पूजा लंबे समय तक सकारात्मक परिणाम देती है।
सरस्वती पूजा की विधि और पूजन सामग्री
बसंत पंचमी के दिन पूजा से पहले घर की साफ-सफाई कर पूजा स्थल को पवित्र किया जाता है। मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र को पीले वस्त्र से ढकी चौकी पर स्थापित करें। पीला रंग इस दिन विशेष शुभ माना जाता है। पूजा में हल्दी, कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप, गंगाजल और पीले फूलों का प्रयोग करें। इसके साथ ही कलश, नारियल, केले, आम के पत्ते और पीली चुनरी भी अर्पित करें।
पूजा के दौरान मां सरस्वती के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें। विद्यार्थी अपनी किताबें और लेखन सामग्री मां के चरणों में रखें। मान्यता है कि ऐसा करने से विद्या में वृद्धि होती है और बुद्धि तेज होती है। इस दिन वाणी में मधुरता बनाए रखना और सात्विक भोजन करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई सरस्वती पूजा न केवल ज्ञान प्रदान करती है, बल्कि जीवन में नई दिशा भी देती है।








