ज्योतिष शास्त्र में पुखराज को बृहस्पति का प्रतिनिधि माना जाता है। यह रत्न न केवल आर्थिक स्थिरता देता है बल्कि शिक्षा और वैवाहिक जीवन में भी खुशहाली लाता है। पुखराज पहनने से निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और समाज में मान-सम्मान मिलता है। व्यापार, शिक्षा और सरकारी नौकरी के क्षेत्र में काम करने वालों के लिए यह विशेष लाभकारी है।
कैसे पहनें: गुरुवार की सुबह सूर्योदय के समय पुखराज को सोने या पीतल की अंगूठी में जड़वाकर तर्जनी उंगली में धारण करें। इसे पहनने से पहले गंगाजल और दूध से शुद्ध करना आवश्यक है। साथ ही “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जाप करने से इसका प्रभाव बढ़ता है।
किसे पहनना चाहिए: मुख्य रूप से धनु और मीन राशि वाले लोग पुखराज से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वृषभ, कन्या और तुला राशि के लोगों को बिना विशेषज्ञ सलाह के इसे पहनने से बचना चाहिए।
माणिक्य (Ruby): आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का रत्न
माणिक्य सूर्य का प्रतिनिधि रत्न है और इसे रत्नों का राजा माना जाता है। यह रत्न पहनने वाले व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करता है। सरकारी नौकरी, राजनीति या किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व करना चाहते हैं, उनके लिए माणिक्य अत्यंत लाभकारी है। हृदय संबंधी स्वास्थ्य में भी यह मददगार साबित होता है।
कैसे पहनें: रविवार की सुबह तांबे या सोने की अंगूठी में माणिक्य को अनामिका (रिंग फिंगर) में पहनें। इसे पहनने से पहले “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करके शुद्ध करना अनिवार्य है।
किसे पहनना चाहिए: मेष, सिंह और धनु राशि वाले लोग माणिक्य धारण कर सकते हैं। अगर सूर्य नीच में हो या राशि कन्या, मकर या कुंभ हो, तो इसे पहनने से बचें।
नीलम: शक्ति और तेजी से सफलता दिलाने वाला रत्न
नीलम को रत्नों में सबसे शक्तिशाली माना जाता है। यह शनि देव का प्रतिनिधि है और व्यक्ति की जीवन में बाधाओं को दूर करके आर्थिक समृद्धि और सफलता दिलाने में मदद करता है। शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती के प्रभाव को कम करने के लिए नीलम अत्यंत प्रभावशाली है। व्यापार और तकनीकी क्षेत्र में विशेष लाभ देता है।
कैसे पहनें: शनिवार को पंचधातु या सोने की अंगूठी में नीलम को मध्यमा (बीच वाली) उंगली में पहनें। इसे पहनने से पहले शनि देव के चरणों में स्पर्श कराएं और “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें। कम से कम 7-8 रत्ती का नीलम होना चाहिए।
किसे पहनना चाहिए: मकर और कुंभ राशि वालों के लिए नीलम विशेष रूप से लाभकारी है। पहनने से पहले 2-3 दिन तक तकिए के नीचे रखकर इसका परीक्षण करना चाहिए।
रत्न धारण में सावधानियां और विशेष नियम
रत्न पहनना एक ज्योतिषीय प्रक्रिया है। गलत रत्न पहनने से विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है। इसलिए किसी भी रत्न को पहनने से पहले गंगाजल, कच्चा दूध, शहद और तुलसी के मिश्रण से शुद्ध करें। ध्यान रखें कि नीलम के साथ माणिक्य, मूंगा या मोती कभी भी एक साथ नहीं पहनें क्योंकि शनि का सूर्य और मंगल के साथ शत्रुता का भाव होता है। सही समय और विधि से रत्न धारण करने पर ये आपकी मेहनत को सफलता में बदल सकते हैं और बंद किस्मत का ताला खोल सकते हैं।







