नवंबर महीने की शुरुआत धार्मिक दृष्टि से खास रहने वाली है। रविवार, 1 नवंबर को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना के लिए उपवास करेंगी। खास बात यह है कि इस दिन पुष्य नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि दोपहर तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। आइए जानते हैं इस दिन के शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
1 नवंबर का पंचांग और नक्षत्र का समय
रविवार को कार्तिक कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि दोपहर 2 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन साध्य योग दोपहर 2 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। वहीं, पुष्य नक्षत्र पूरी रात बना रहेगा और 2 नवंबर की सुबह 4 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। रात्रि में अष्टमी तिथि होने के कारण अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा।
पूजा-पाठ के लिए ये शुभ मुहूर्त रहेंगे खास
1 नवंबर को धार्मिक कार्यों और पूजा-पाठ के लिए कई शुभ समय उपलब्ध रहेंगे। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:50 से 5:42 बजे तक रहेगा। प्रातः संध्या का समय सुबह 5:16 से 6:33 बजे तक है। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:46 से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2:00 से 2:44 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 5:43 से 6:09 बजे तक रहेगा। सायाह्न संध्या का समय शाम 5:43 से 7:00 बजे तक निर्धारित है।
अलग-अलग शहरों में इस समय रहेगा राहुकाल
रविवार को राहुकाल का समय शहर के अनुसार अलग-अलग रहेगा। दिल्ली और चंडीगढ़ में शाम 4:13 से 5:36 बजे तक राहुकाल रहेगा। मुंबई में शाम 4:40 से 5:05 बजे तक, लखनऊ में शाम 4:00 से 5:24 बजे तक और भोपाल में शाम 4:17 से 5:42 बजे तक रहेगा। कोलकाता में दोपहर 3:34 से शाम 5:59 बजे तक, अहमदाबाद में शाम 4:37 से 5:01 बजे तक और चेन्नई में शाम 4:15 से 5:42 बजे तक राहुकाल रहेगा। सूर्योदय सुबह 6:32 बजे और सूर्यास्त शाम 5:36 बजे होगा।
संतान की खुशहाली के लिए रखा जाएगा अहोई अष्टमी व्रत
अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना से रखती हैं। इस दिन सुबह से उपवास शुरू किया जाता है और शाम को अहोई माता की पूजा की जाती है। परंपरा के अनुसार, रात में तारों के दर्शन करने और उन्हें अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। साल 2026 में रात्रिकालीन अष्टमी तिथि 1 नवंबर को होने के कारण इसी दिन व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
(Disclaimer: यहां पर प्राप्त सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। News India किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)
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