उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नगला श्री पदम गांव में जो दर्दनाक मंजर सामने आया, उसने हर किसी की रूह को झकझोर कर रख दिया है। शनिवार की सुबह जब एक ही घर से पति, पत्नी और उनके तीन मासूम बच्चों के शव बरामद हुए, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। शुरुआती दौर में लोगों का यही मानना था कि शायद रात में जहरीला खाना (नूडल्स) खाने की वजह से फूड पॉइजनिंग से इन सबकी जान चली गई। लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने इस मामले की तहकीकात शुरू की, परत-दर-परत ऐसे खौफनाक राज खुलने लगे जिसने इस घटना को महज एक हादसा न रहकर गहरी साजिश और पारिवारिक कलह का रूप दे दिया। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए मृतका के भाई की शिकायत पर सख्त कानूनी कदम उठाए हैं।
मोबाइल में मिला आखिरी संदेश, बहनों और जीजा पर लगे गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में उस वक्त नया और हैरान करने वाला मोड़ आया जब पुलिस ने मृतक 37 वर्षीय महेश के मोबाइल फोन की जांच की। महेश के फोन से एक बेहद भावुक और दर्दनाक वॉयस नोट हाथ लगा, जिसमें उसने अपनी मौत का जिम्मेदार अपनी ही खून के रिश्तों को ठहराया है। ऑडियो रिकॉर्डिंग में महेश ने साफ तौर पर कहा कि उसकी दो बड़ी और छोटी बहनें तथा उसका जीजा उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। शुरुआती जांच और परिजनों के बयानों से इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि इस पूरे खौफनाक कदम के पीछे पैतृक जमीन और संपत्ति का कोई पुराना विवाद जुड़ा हुआ था। अपनों की बेरुखी और लगातार मिल रहे अपमान से तंग आकर परिवार ने यह खौफनाक रास्ता चुना।
विसरा रिपोर्ट खोलेगी राज, पुलिस ने तीन मुख्य आरोपियों को किया गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए रबूपुरा पुलिस ने बिना कोई वक्त गंवाए त्वरित कार्रवाई की। मृतका के भाई आकाश की लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का गंभीर मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने नामजद किए गए तीनों आरोपियों—मृतक की बड़ी बहन सुनीता, छोटी बहन सपना और जीजा शेखर उर्फ चंद्रशेखर को तुरंत गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि उन्होंने महेश पर किस हद तक दबाव बनाया था। हालांकि, मौत के असली और वैज्ञानिक कारणों का पुख्ता पता लगाने के लिए पुलिस ने सभी पांचों शवों का वीडियोग्राफी के साथ डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया है और विसरा सुरक्षित कर विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेज दिया है।
मासूमों की बेगुनाही पर भारी पड़ी अपनों की कलह और कड़वाहट
यह घटना इस बात का बेहद दर्दनाक उदाहरण है कि जब परिवार के भीतर लालच, जमीन-जायदाद का मोह और रिश्तों की कड़वाहट हद पार कर जाती है, तो इंसानियत पूरी तरह दम तोड़ देती है। जिन तीन मासूम बच्चों—सात साल की बेटी मिष्टी, 11 साल के बेटे लड्डू और तीन साल के छोटे बेटे साक्षात ने अभी दुनिया ठीक से देखी भी नहीं थी, वे बड़ों के आपसी विवाद और मानसिक दबाव की भेंट चढ़ गए। आसपास की सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर भी किसी बाहरी व्यक्ति के घर में घुसने की कोई पुष्टि नहीं हुई है, जिससे यह साफ है कि यह खौफनाक त्रासदी घर के अंदर उपजे क्लेश और मानसिक प्रताड़ना का परिणाम थी। पुलिस और प्रशासन अब इस मामले के हर एक पहलू को खंगालने में जुटा है ताकि दोषियों को कानून के तहत सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।








