जुबीन गर्ग मौत केस में बड़ा मोड़: एक साल बाद जेल से रिहा हुईं सिंगर अमृतप्रभा महंत

असम के चर्चित और लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग की रहस्यमयी मौत के मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल सिंगर अमृतप्रभा महंत आखिरकार एक साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जेल से बाहर आ चुकी हैं। गुवाहाटी हाईकोर्ट से जमानत मिलने के चार दिन बाद मंगलवार को उन्हें हाफलोंग सब-जेल से रिहा कर दिया गया। सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद उनकी रिहाई संभव हो सकी। इस सनसनीखेज मामले में जमानत पाने वाली वह पहली मुख्य आरोपी हैं, जिससे राज्य के संगीत प्रेमियों और गलियारों में एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

मेडिकल लापरवाही और हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियां

अमृतप्रभा महंत पिछले साल 17 अक्टूबर 2025 से सलाखों के पीछे थीं। इस मामले पर सुनवाई करते हुए गुवाहाटी हाईकोर्ट के जस्टिस प्रांजल दास ने 9 अक्टूबर को उन्हें पचास हजार रुपए के बॉन्ड और उतनी ही रकम की दो स्थानीय जमानतों पर राहत प्रदान की थी। अदालत ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि शुरुआती जांच से ऐसा प्रतीत होता है कि सिंगापुर यात्रा के दौरान जुबीन गर्ग की सेहत को लेकर उचित मेडिकल सावधानियां नहीं बरती गईं। चूंकि सिंगर पहले से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे, इसलिए उनके साथ एक मेडिकल अटेंडेंट या केयरटेकर का होना अनिवार्य था जो डॉक्टरों के प्रोटोकॉल का ठीक से पालन करवा सके।

सिंगापुर यात्रा और एसआईटी की चार्जशीट का पूरा सच

आपको बता दें कि यह पूरा मामला पिछले साल 19 सितंबर 2025 का है, जब जुबीन गर्ग सिंगापुर में आयोजित नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में हिस्सा लेने पहुंचे थे और समुद्र में तैरने के दौरान उनकी अचानक मौत हो गई थी। उनकी असमय मौत से पूरे पूर्वोत्तर भारत में भारी शोक और रोष फैल गया था, जिसके बाद असम सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) का गठन किया था। एसआईटी द्वारा दाखिल चार्जशीट में कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिसमें फेस्टिवल के आयोजक श्यामकानु महंत, मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, बैंड सदस्य शेखरज्योति गोस्वामी और अमृतप्रभा महंत पर हत्या जैसे गंभीर आरोप तय किए गए हैं।

आगे की कानूनी प्रक्रिया और ट्रायल का इंतजार

हालांकि हाईकोर्ट ने अमृतप्रभा महंत को जमानत तो दे दी है, लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि मेडिकल प्रोटोकॉल की अनदेखी के लिए असल में कौन जिम्मेदार है और क्या इसके आधार पर आपराधिक मामला बनता है, इसका फैसला आने वाले मुख्य ट्रायल के दौरान ही किया जाएगा। इस मामले में जुबीन के कजिन संदीपन गर्ग पर गैर-इरादतन हत्या तथा उनके निजी सुरक्षा अधिकारियों नंदेश्वर बोरा और परेश बैश्य पर आपराधिक साजिश और विश्वासघात के आरोप लगाए गए हैं। अब देखना यह होगा कि इस बहुचर्चित मामले में आगे अदालत का रुख क्या रहता है और बाकी आरोपियों को कब तक राहत मिल पाती है।

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