दिल्ली पुलिस द्वारा विरोध प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर को निर्धारित स्थलों की सूची से हटाने के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। केंद्र सरकार के निर्देश पर गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर पुलिस ने यह स्थायी आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब जंतर-मंतर की जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को नए धरना स्थल के रूप में तय किया गया है। इस औचक और बड़े फैसले के सामने आते ही विपक्षी नेताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इसे तानाशाही करार दिया है।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक का तीखा तंज
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि सरकार ने जंतर-मंतर को सूची से भले ही हटा दिया हो, लेकिन इस फैसले से जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वैसे भी उस कायर तानाशाह ने इस जगह को युद्ध का मैदान बना दिया था, लेकिन अब इस कार्रवाई के बाद पूरा देश ही जंतर-मंतर बन जाएगा और हर गली-मोहल्ले से हुक्मरानों के खिलाफ आवाज उठेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला
सीजेपी नेता सौरव दास ने इस फैसले को देश के लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जंतर-मंतर से क्यों डरते हैं, जो देश के आम नागरिकों की आवाज उठाने का एक बड़ा केंद्र रहा है? उन्होंने कहा कि बिना किसी स्टेकहोल्डर और आम जनता से चर्चा किए यह मनमाना आदेश थोपा गया है। सौरव दास ने चेतावनी भरे लहजे में लिखा कि जिस तरह सरकार लोगों के इस ऐतिहासिक स्थल को डी-नोटिफाई कर रही है, उसी तर्ज पर प्रधानमंत्री जल्द ही पूरे भारत में लोकतंत्र को भी डी-नोटिफाई कर देंगे।
जनता के मौलिक अधिकारों पर करारा प्रहार
आशुतोष रांका ने इस पूरे घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार की ऐसी दमनकारी नीतियों को देखते हुए क्यों न सीधे तौर पर माउंट एवरेस्ट को ही विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगह घोषित कर दिया जाए? नेताओं का साफ कहना है कि शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और अपनी बात रखने का नागरिकों का मौलिक अधिकार छीना जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि पुलिस प्रशासन का दावा है कि इन नए स्थानों के लिए जल्द ही विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जाएगी।
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