‘अभी थोड़ा इंतजार कीजिए…’, स्टारलिंक विवाद में राहुल गांधी की एंट्री, एलन मस्क ने क्यों कहा- थैंक्यू?

भारत में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस मिलने में हो रही देरी अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बनती जा रही है। इस विवाद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की एंट्री के बाद एलन मस्क ने भी उनकी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। मस्क ने राहुल गांधी को धन्यवाद देते हुए मामले को गंभीर और चिंताजनक बताया। वहीं, इस पूरे विवाद के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी का नाम भी चर्चा में आ गया है।

राहुल गांधी ने कहा- भारत में आपका स्वागत है, थोड़ा इंतजार कीजिए

राहुल गांधी ने एलन मस्क की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत में उनका स्वागत है और उन्हें दूसरे व्यक्ति के बारे में जानने के लिए थोड़ा इंतजार करना चाहिए। राहुल की इस टिप्पणी के बाद मस्क ने उनका शुक्रिया अदा किया और कहा कि यह स्थिति वास्तव में बेहद चिंताजनक है। दोनों की सोशल मीडिया पर हुई बातचीत के बाद स्टारलिंक को भारत में लाइसेंस मिलने में देरी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इससे पहले भी मस्क भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार और नियामकीय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा चुके हैं।

एलन मस्क ने अंबानी का नाम लेकर क्या पूछा?

मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट का जवाब देते हुए सवाल उठाया कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं। यह पोस्ट एक यूजर की उस टिप्पणी के जवाब में थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सरकार किसी कंपनी के हितों की रक्षा कर रही है। मस्क का कहना है कि स्टारलिंक को दुनिया के 165 देशों में सेवा देने की अनुमति मिल चुकी है। उन्होंने सवाल किया कि जरूरी नियमों और प्रक्रियाओं को पूरा करने के बावजूद भारत में उनकी कंपनी को लाइसेंस मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है। अंबानी का नाम आने के बाद इस विवाद ने देश के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

सरकार ने आरोपों को बताया गलत, सुरक्षा मंजूरी का इंतजार

भारत सरकार पहले ही स्टारलिंक को लेकर लगाए जा रहे भेदभाव के आरोपों को खारिज कर चुकी है। सरकार का कहना है कि भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन से जुड़े नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होते हैं। सरकार के मुताबिक लाइसेंस की प्रक्रिया में सुरक्षा से जुड़ी मंजूरी अहम चरण है और इसमें किसी एक कंपनी के लिए अलग नियम नहीं बनाए गए हैं। संचार राज्यमंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने भी कहा है कि स्टारलिंक का मामला गृह मंत्रालय के स्तर पर लंबित है। सरकार का पक्ष है कि सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद नियामकीय प्रक्रिया के अगले चरण पर आगे बढ़ा जाएगा।

कैसे शुरू हुआ विवाद और अब आगे क्या होगा?

स्टारलिंक को भारत में लाने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है, लेकिन लाइसेंस और सुरक्षा मंजूरी को लेकर मामला आगे नहीं बढ़ पाया है। इसी बीच एलन मस्क की ओर से भारतीय बाजार में कुछ प्रभावशाली कारोबारी हितों पर सवाल उठाए गए। हालांकि सरकार का कहना है कि प्रक्रिया पारदर्शी है और सभी कंपनियों के लिए समान नियम लागू हैं। फिलहाल स्टारलिंक की सुरक्षा संबंधी जांच पूरी होने का इंतजार है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारत में स्टारलिंक को अंतिम मंजूरी कब मिलेगी और क्या इस विवाद का असर देश के तेजी से बढ़ते सैटेलाइट इंटरनेट बाजार पर भी पड़ेगा।

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