कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा के बाद BJP ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। BJP की ओर से स्मृति ईरानी (Smriti Iran) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव में अपेक्षित नतीजे नहीं मिलने के बाद व्यवस्था पर सवाल खड़े करने के बजाय पार्टी को अपने प्रदर्शन पर भी विचार करना चाहिए। ईरानी ने चुनाव आयोग को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि संस्था पर लगाए जा रहे आरोपों से पहले उसके सामने मौजूद तथ्यों को देखना जरूरी है।
मतदाता सूची को लेकर ईरानी ने पूछा सवाल
स्मृति ईरानी (Smriti Iran) ने मतदाता सूची में दर्ज नामों को लेकर कांग्रेस से कई सवाल किए। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम एक से ज्यादा जगह दर्ज है या किसी ऐसे व्यक्ति का नाम सूची में मौजूद है जिसकी मृत्यु हो चुकी है, तो चुनावी रिकॉर्ड को ठीक करने की प्रक्रिया पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए। ईरानी ने चुनाव आयोग की उस प्रक्रिया का भी जिक्र किया जिसमें बूथ लेवल अधिकारी संबंधित मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच कर सकते हैं। उनका कहना था कि मतदाता सूची को सही रखना चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है।
मोदी के पुराने बयान का भी किया जिक्र
BJP नेता स्मृति ईरानी (Smriti Iran) ने अपने संबोधन के दौरान 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़े राजनीतिक विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद होना सामान्य है, लेकिन चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाते समय जिम्मेदारी के साथ बात रखी जानी चाहिए। वहीं कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठा रही है। कांग्रेस की ओर से प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर जवाब मांगा गया है।
कांग्रेस के इतिहास का जिक्र कर भी साधा निशाना
स्मृति ईरानी (Smriti Iran) ने कांग्रेस के पुराने इतिहास का उल्लेख करते हुए उसके गठन से जुड़े ब्रिटिश काल के संदर्भों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस अपने पुराने अधिवेशनों और ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करती है तो संगठन के शुरुआती दौर की परिस्थितियों पर भी चर्चा होनी चाहिए। ईरानी ने इसी आधार पर कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर गलत माहौल बनाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग से जुड़े उसके सवाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों से संबंधित हैं। इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है।
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