West Bengal News: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक आशीष बनर्जी की मौत के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उनका शव रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय में मिला। घटनास्थल से एक कथित सुसाइड नोट भी मिलने की बात सामने आई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इस बीच बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने सवाल उठाया है कि क्या आशीष बनर्जी को किसी तरह की धमकी दी गई थी या वह किसी दबाव में थे। उन्होंने मामले से जुड़े हर पहलू की जांच की मांग की है।
परिवार से बात के बाद शुभेंदु अधिकारी ने उठाया बड़ा सवाल
शुभेंदु अधिकारी ने आशीष बनर्जी के परिवार से बातचीत के बाद कहा कि पुलिस को इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि क्या उन्हें किसी ने धमकी दी थी। उन्होंने कॉल रिकॉर्ड खंगालने और घटनास्थल से मिले कथित सुसाइड नोट की भी जांच करने की बात कही। शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक, परिवार ने बताया कि आशीष बनर्जी के स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस के साथ संबंध अच्छे थे। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद घटना है और जांच में किसी भी संभावित कारण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह परिवार से मिलने जाएंगे।
कथित सुसाइड नोट में भ्रष्टाचार के आरोपों पर सफाई
मामले में सामने आए कथित सुसाइड नोट में आशीष बनर्जी ने खुद को भ्रष्टाचार से पूरी तरह अलग बताया है। पत्र में उन्होंने दावा किया कि उन्होंने राजनीतिक जीवन में कभी किसी से आर्थिक फायदा नहीं लिया। उन्होंने यह भी लिखा कि उनके ऊपर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप झूठे थे और उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई। नोट में उन्होंने तारापीठ-रामपुरहाट विकास प्राधिकरण यानी TRDA से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर भी सफाई दी। उनका दावा था कि वह टेंडर समिति में शामिल नहीं थे और किसी चेक पर हस्ताक्षर करने या किसी योजना को मंजूरी देने का अधिकार भी उनके पास नहीं था। हालांकि, इस कथित नोट की वास्तविकता और उसमें लिखी बातों की पुलिस जांच कर रही है।
25 साल तक रहे विधायक, चुनाव हारने के बाद बदले हालात
आशीष बनर्जी रामपुरहाट विधानसभा सीट से लंबे समय तक विधायक रहे। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी के ध्रुब साहा से हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव के बाद उन्होंने पार्टी के जिला संगठन से जुड़े कुछ पदों से भी दूरी बनाई थी। जून 2026 में उन्होंने टीएमसी की बीरभूम जिला कोर कमेटी से इस्तीफा दिया था और जिला अध्यक्ष पद से भी हटने की इच्छा जताई थी। उनकी मौत के बाद अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अभी किसी एक वजह को मौत का कारण मानना जल्दबाजी होगी। पुलिस जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कथित सुसाइड नोट की जांच के बाद ही मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
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