रांची में जारी छात्रों के ऐतिहासिक और उग्र आंदोलन के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली की जांच कर रही सीआईडी (CID) द्वारा समन भेजे जाने के बाद, JPSC के तीन प्रमुख सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। राज्यपाल संतोष गंगवार ने इन तीनों का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार भी कर लिया है। दूसरी ओर, नाराज छात्रों और सरकार के बीच रविवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को लेकर गतिरोध अभी भी बरकरार है जिसके चलते छात्रों ने सोमवार को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है।
पूछताछ के डर से इस्तीफा या प्रशासनिक कार्रवाई का दबाव?
राजधानी रांची में पिछले 16 दिनों से जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्रों का गुस्सा फूट रहा है। इसी बीच, सीआईडी ने आयोग की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की जांच के सिलसिले में JPSC के तीन सदस्यों—अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनिमा हांसदा को समन भेजकर सोमवार यानी 10 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया था। लेकिन ठीक पूछताछ से पहले ही इन तीनों सदस्यों ने अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राज्यपाल ने मंजूर कर लिया है। इस अचानक हुए घटनाक्रम से राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इसे जांच एजेंसियों के शिकंजे से बचने की एक बड़ी प्रशासनिक हलचल के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार और छात्रों के बीच मैराथन बैठक, 14वीं JPSC प्री परीक्षा रद्द
रविवार को आंदोलनरत छात्रों और झारखंड सरकार के बीच तीसरे दौर की उच्चस्तरीय वार्ता हुई, जिसमें सरकार ने छात्रों की कई बड़ी और मुख्य मांगें मान लीं। भारी विरोध प्रदर्शन और गंभीर अनियमितताओं के आरोपों को ध्यान में रखते हुए हेमंत सोरेन सरकार ने 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह से रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। इसके अलावा, विवादित वेंडर एजेंसी ‘टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए कराई गई पिछली सभी परीक्षाओं में हुए कथित वित्तीय लेन-देन और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच अब केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी (ED) से कराने पर भी सरकार सहमत हो गई है, जिससे भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों पर शिकंजा कसने की उम्मीद बढ़ गई है।
जेएसएससी सीजीएल पर फंसा पेंच, आज विधानसभा घेराव का ऐलान
भले ही सरकार ने जेपीएससी और वेंडर एजेंसी से जुड़े मामलों में कड़े कदम उठाए हैं, लेकिन जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा को रद्द करने की छात्रों की प्रमुख मांग को फिलहाल मानने से सरकार ने इनकार कर दिया है। सरकार का पक्ष है कि इस परीक्षा में गड़बड़ी के तमाम आरोपों की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाएगी। हालांकि, छात्र इस बात पर अड़े हैं कि जब तक जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को भी रद्द नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। इसी मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने सोमवार, 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव करने की बड़ी घोषणा कर दी है, जिससे प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।
अनशन जारी, मंत्रियों की अपील को नकारा
उधर, इस पूरे घटनाक्रम के बीच सरकार और छात्रों के बीच जारी बातचीत के दौरान हाई लेवल कमेटी में शामिल कैबिनेट मंत्रियों ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया। मंत्रियों ने उनकी सेहत का हवाला देते हुए तुरंत भूख हड़ताल खत्म करने की पुरजोर अपील की, लेकिन आंदोलनकारियों और अनशनकारियों ने साफ शब्दों में कह दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका यह अनशन और संघर्ष यूं ही जारी रहेगा। राज्य में चल रहे इस छात्र आंदोलन ने अब एक विकराल रूप ले लिया है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
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