राजधानी दिल्ली में पिछले एक महीने से चल रहा सीजेपी और छात्रों का आंदोलन अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले चुका है। 20 जुलाई को जब प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर संसद भवन की ओर बढ़े, तो पुलिस और छात्रों के बीच ज़बरदस्त हिंसक झड़प देखने को मिली। स्थिति को बेकाबू होता देख पुलिस प्रशासन की तरफ से लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। नीट परीक्षा धांधली और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब महज़ जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
जन-आंदोलन के केंद्र में सोनम वांगचुक और छात्रों का गुस्सा
इस पूरे आंदोलन की शुरुआत नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुई थी, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके और जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक मुख्य भूमिका में रहे। सोनम वांगचुक द्वारा किए गए आमरण अनशन के दौरान जब उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा, तो प्रशासन ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद ही छात्रों और प्रदर्शनकारियों का आक्रोश सीमा पार कर गया। छात्रों पर हुए बल प्रयोग और उनके साथ हुए दुर्व्यवहार की गूंज देश की राजधानी में साफ सुनाई देने लगी, जिसने आखिरकार संसद के गलियारों में भी दस्तक दे दी।
अखिलेश यादव के तीखे बोल और संसद का गर्माया माहौल
संसद का मानसून सत्र दो दिनों की देरी से शुरू ज़रूर हुआ, लेकिन शुरू होते ही विपक्ष ने सरकार पर जोरदार हमला बोल दिया। कन्नौज से सांसद और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा में सत्ता पक्ष को कटघरे में खड़ा करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि मंत्री जी के इस्तीफे की बात तो बाद में होगी, असल सवाल छात्रों के साथ हुए बर्ताव का है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के सिर फोड़े गए, उन पर डंडे बरसाए गए और यहाँ तक कि बेटियों के साथ भी अभद्रता की गई। अखिलेश यादव का यह गुस्सैल और आक्रामक रूप देखकर सत्ता पक्ष के नेता भी हैरान रह गए।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
संसद में अखिलेश यादव के इस भाषण का वीडियो अब इंटरनेट पर बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है। अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाखों लोग इस वीडियो को देख चुके हैं और इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। बड़ी संख्या में यूजर्स अखिलेश यादव के इस कड़े रुख का समर्थन कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को आम जनता और छात्रों के हक के लिए इसी तरह मुखर होकर बोलना चाहिए। सोशल मीडिया पर लोग इस मुद्दे को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं और पीड़ित छात्रों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।








