पंजाब की राजनीति में उस समय नया भूचाल आ गया जब मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित वायरल वीडियो मामले में रिश्वत और फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराने के आरोप सामने आए। गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज एक मामले में दावा किया गया है कि कुछ लोगों ने वीडियो को नकली साबित करने के लिए मनगढ़ंत तकनीकी रिपोर्ट तैयार कराने की कोशिश की। इस मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि जांच के दायरे में पंजाब पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी बताई जा रही है। फिलहाल आरोपों की सत्यता की जांच जारी है और संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
फॉरेंसिक विशेषज्ञ के बयान से खुली कथित साजिश की परतें
मामले में नया मोड़ तब आया जब फॉरेंसिक विशेषज्ञ जसप्रीत सिंह ने पुलिस को शिकायत देकर दावा किया कि उनसे दबाव में एक ऐसी रिपोर्ट तैयार करवाई गई, जिसमें वायरल वीडियो को एआई जनरेटेड या डीपफेक बताया जाना था। शिकायत के अनुसार, कुछ लोगों ने उनसे बार-बार रिपोर्ट का मसौदा बदलवाया ताकि निष्कर्ष पहले से तय कथानक के अनुरूप दिखाई दे। जसप्रीत का कहना है कि शुरुआत में उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि रिपोर्ट का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाएगा। बाद में जब उन्हें पूरे मामले की गंभीरता का एहसास हुआ तो उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। शिकायत में दिल्ली और पंचकूला के दो साइबर विशेषज्ञों के नाम भी शामिल किए गए, जिन पर कथित तौर पर इस प्रक्रिया में सहयोग करने का आरोप है।
होटल मीटिंग, नकदी और जांच के घेरे में अधिकारी
शिकायत में दावा किया गया है कि जून के मध्य में गुरुग्राम के एक होटल में कई मुलाकातें हुईं, जहां कथित रूप से वीडियो को फर्जी साबित करने की रणनीति पर चर्चा की गई। आरोप है कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने ऐसी रिपोर्ट तैयार कराने का निर्देश दिया जिसमें वीडियो को डीपफेक बताया जाए। फॉरेंसिक विशेषज्ञ ने कथित रूप से इस पर आपत्ति जताई, लेकिन बाद में उन्हें बड़ी रकम देने का आश्वासन दिया गया। शिकायत के मुताबिक, होटल से निकलते समय उन्हें 10 लाख रुपये नकद दिए गए। हालांकि इन आरोपों की अभी अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस जांच में पैसों के लेनदेन और बैंक रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि क्या वास्तव में किसी रिपोर्ट को प्रभावित करने के लिए आर्थिक लाभ दिया गया था।
राजनीतिक और धार्मिक विवाद के बीच बढ़ा दबाव
यह पूरा मामला उस वायरल वीडियो से जुड़ा है जिसे लेकर पहले से ही पंजाब में राजनीतिक और धार्मिक बहस चल रही है। एक तरफ कुछ धार्मिक संगठनों ने वीडियो को असली बताया है, वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे पूरी तरह फर्जी और छेड़छाड़ कर तैयार किया गया वीडियो बताया है। उनका कहना है कि उन्हें बदनाम करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर अब रिश्वत और कथित फर्जी रिपोर्ट का मामला सामने आने से विवाद और गहरा गया है। गुरुग्राम पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ कई नए खुलासों की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो, फॉरेंसिक रिपोर्ट और कथित रिश्वत प्रकरण के पीछे वास्तविक सच्चाई क्या है। फिलहाल यह मामला पंजाब की राजनीति का सबसे चर्चित और संवेदनशील मुद्दा बन चुका है।
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